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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट रोल्स में राज्य भर में औसतन हर विधानसभा सीट पर 19,795 नाम हटाए गए हैं, जबकि कुल मिलाकर 58 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) इसे ‘सवा करोड़ बंगालियों को लाइन में लगाने’ की साजिश बता रही है, वहीं भाजपा इसे ‘घोस्ट वोटर्स’ और घुसपैठियों के खिलाफ सफाई अभियान करार दे रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाकर अपनी जुझारू छवि को फिर से मजबूत किया है, जबकि राज्य भर में उनकी काले कोट वाली होर्डिंग्स लगाई गई हैं।

गौरतलब हैं कि, SIR प्रक्रिया अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी, जब चुनाव आयोग ने नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष संशोधन शुरू किया। पश्चिम बंगाल में यह अभियान सबसे विवादास्पद साबित हुआ है। राज्य की कुल मतदाता संख्या पहले लगभग 7.66 करोड़ थी, जो ड्राफ्ट रोल्स के बाद घटकर 7.08 करोड़ रह गई। इसमें मृतक, स्थायी रूप से स्थानांतरित और पता न चलने वाले (untraceable) मतदाताओं के नाम प्रमुख रूप से हटाए गए। चुनाव आयोग के अनुसार, मृतकों के नामों की संख्या करीब 24 लाख, स्थानांतरितों की लाखों में और विसंगति (logical discrepancy) वाली श्रेणी में 1.36 करोड़ से अधिक मामलों की जांच चल रही है।

इस संबंध में TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, “भाजपा ने SIR से हमारी लड़ाई आसान कर दी। 15 साल की सत्ता में कुछ एंटी-इंकंबेंसी होती, लेकिन अब SIR ने उसे खत्म कर दिया। ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में लगवा दिया।” उन्होंने आरोप लगाया कि ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ के नाम पर सामान्य बंगालियों के नाम काटे जा रहे हैं, जबकि भाजपा पहले इसे घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। TMC का दावा है कि यह प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी के समर्थकों, विशेषकर महिलाओं, अल्पसंख्यकों और गरीबों को प्रभावित कर रही है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जहां ममता बनर्जी खुद 4 फरवरी 2026 को पेश हुईं और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला दिया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवारत या पूर्व जिला न्यायाधीशों को न्यायिक अधिकारी बनाकर दावों और आपत्तियों का निपटारा कराया जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। TMC ने इसे ‘लोगों की बड़ी जीत’ बताया है।

यहां यह बता दें कि, राज्य भर में SIR का असर अलग-अलग दिख रहा है। जलपाईगुड़ी जिले में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा, जहां दाबग्राम-फुलबाड़ी सीट (भाजपा के पास) से 38,395 नाम हटे, जिनमें 12 हजार मृतक और 19 हजार अज्ञात। सिलीगुड़ी में 31,181 और कालिम्पोंग में 17,321 नाम कटने की संभावना है। उच्च प्रोफाइल सीटों जैसे भबानीपुर (ममता की सीट), कोलकाता पोर्ट, बल्लीगंज और रसबेहारी में कुल 2.16 लाख नाम हटे, जो इनकी कुल मतदाता संख्या का 24 प्रतिशत है। सीमा क्षेत्रों में घुसपैठ के आरोपों के बीच यह प्रक्रिया और संवेदनशील हो गई है।

कुल मिलाकर यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला रहा है। TMC इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बता रही है और ‘मे आई हेल्प यू’ कैंप चला रही है, जबकि भाजपा इसे ‘फर्जी वोटर्स की फैक्ट्री बंद’ करने का अभियान मान रही है। चुनाव नजदीक आने के साथ यह मुद्दा और गरमाएगा, क्योंकि मतदाता सूची का हर बदलाव जीत-हार का गणित प्रभावित कर सकता है। राज्य के 600 किलोमीटर के सफर में साफ है कि अभी रैलियां नहीं, लेकिन वोटर लिस्ट ही असली रणभूमि बनी हुई है।

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