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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमेरिका यात्रा ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाली साबित हुई है, बल्कि भारत के लिए कई लाभकारी अवसरों का द्वार भी खोलती है। 21 फरवरी 2026 को संपन्न हुई इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की, साथ ही अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया और भारतीय प्रवासियों (एनआरआई) से भी बातचीत की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना था, जो भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक स्थिति को मजबूत करेगा।

यहां हम आपको यह बता दें कि, व्यापार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में यह यात्रा भारत के लिए एक बड़ा वरदान साबित हुई। दोनों देशों ने 50 अरब डॉलर के व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल हैं। अमेरिकी कंपनियां जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला ने भारत में निवेश बढ़ाने की घोषणा की। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने मोदी से मुलाकात में भारत में इलेक्ट्रिक वाहन प्लांट लगाने की योजना पर चर्चा की, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति देगा। इससे लाखों नौकरियां पैदा होंगी और भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 8 प्रतिशत तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, अमेरिका ने भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन दिया, जो ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

गौर करने वाली बात यह हैं कि, रक्षा सहयोग इस यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा रहा। दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मालाबार’ को और विस्तार देने पर सहमति जताई। अमेरिका ने भारत को उन्नत हथियार जैसे एमक्यू-9बी ड्रोन और एफ-35 फाइटर जेट की बिक्री को मंजूरी दी। यह समझौता भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहायक होगा। मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस में अपने भाषण में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाया और वैश्विक समुदाय से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, “आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता की चुनौती है।” इस भाषण को अमेरिकी सांसदों ने खड़े होकर तालियां बजाकर सराहा।

अंत में यह बताते चले कि, एनआरआई समुदाय ने मोदी की यात्रा को ‘घर वापसी’ जैसा बताया। कई एनआरआई ने भारत में निवेश करने की इच्छा जताई, विशेषकर स्टार्टअप्स और रियल एस्टेट में। मोदी ने उन्हें ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। शिक्षा क्षेत्र में, अमेरिका ने भारतीय छात्रों के लिए 10,000 अतिरिक्त वीजा जारी करने की घोषणा की, जो उच्च शिक्षा को बढ़ावा देगा।जलवायु परिवर्तन पर समझौते से भारत को स्वच्छ ऊर्जा में निवेश मिलेगा। अमेरिका ने भारत के साथ संयुक्त रूप से COP31 सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। स्वास्थ्य में, दोनों देशों ने कैंसर रिसर्च पर सहयोग बढ़ाया।कुल मिलाकर, मोदी की अमेरिका यात्रा भारत के लिए एक मील का पत्थर है।

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