ढाका। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने बांग्लादेश के एक छात्र नेता को हिरासत में लिया, जो 2024 की हिंसक घटनाओं में एक हिंदू पुलिस अधिकारी की क्रूर हत्या के प्रमुख आरोपी के रूप में वांछित था। आरोपी की पहचान अहमद रजा हसन मेहदी (जिसे महदी अहमद रजा हसन या महदी हसन के नाम से भी जाना जाता है) के रूप में हुई है। वह बांग्लादेश के हबीगंज जिले का निवासी है और ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ (एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट) का हबीगंज जिला इकाई का महासचिव या छात्र समन्वयक रहा है।
हत्या का पूरा मामला और आरोप
मेहदी पर 5 अगस्त 2024 को बानीचांग पुलिस स्टेशन (हबीगंज जिला) में तैनात सब-इंस्पेक्टर संतोष चौधरी (कुछ रिपोर्टों में संतोष शर्मा या संतोष कुमार चौधरी) की हत्या का आरोप है। यह घटना बांग्लादेश में शेख हासिना सरकार के खिलाफ छात्र-नेतृत्व वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन (जिसे जुलाई क्रांति या एंटी-हासिना मूवमेंट कहा जाता है) के चरम पर हुई थी। विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसमें पुलिस स्टेशनों पर हमले, आगजनी, लूटपाट और अल्पसंख्यक समुदायों (खासकर हिंदुओं) पर लक्षित हिंसा की कई घटनाएं दर्ज हुईं।
सूत्रों के अनुसार, मेहदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह पुलिस स्टेशन के अंदर बैठकर दावा कर रहा था कि “हमने बानीचांग थाने को आग लगाई और हिंदू अधिकारी एसआई संतोष को जिंदा जला दिया।” यह वीडियो जनवरी 2026 में फिर वायरल हुआ, जब मेहदी ने एक अन्य घटना में पुलिस को धमकी दी थी। हालांकि, मेहदी ने इसे “जीभ फिसलने” की बात कही, लेकिन वीडियो ने जांच एजेंसियों को सक्रिय कर दिया। आरोपों में पुलिस स्टेशन में आग लगाना, संपत्ति नष्ट करना और धार्मिक आधार पर हिंसा फैलाना भी शामिल है।
मेगौरतलब हैं कि, हदी भारत पहुंचा था और यहां से यूरोप भागने की योजना बना रहा था। इमिग्रेशन अधिकारियों को बांग्लादेश से प्राप्त वांछित सूची और इंटर-एजेंसी इनपुट मिले, जिसके आधार पर एयरपोर्ट पर उसकी पहचान हुई। दस्तावेज जांच के दौरान संदेह होने पर उसे हिरासत में लिया गया। भारतीय एजेंसियों ने त्वरित और समन्वित कार्रवाई की, जो सीमा-पार अपराधियों पर निगरानी के मजबूत तंत्र को दर्शाती है। डिपोर्टेशन के दौरान मेहदी ने कथित तौर पर पुलिस द्वारा शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया, लेकिन मुख्य रूप से उसे बांग्लादेश भेज दिया गया।
बता दें कि, यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि धार्मिक हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़ा है। बांग्लादेश में ऐसी घटनाओं की जांच और न्याय सुनिश्चित करना अब अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है। मेहदी की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवार और समुदाय को न्याय की उम्मीद मिली है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता और अल्पसंख्यक सुरक्षा अभी भी चुनौती बनी हुई है।
