नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि देश की हर सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए ठीक से तय और अतिक्रमण-मुक्त जगह सुनिश्चित की जाए। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नरराज से कहा कि संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश दें कि पैदल चलने के लिए बनी जगह पर अतिक्रमण न हो और उसे मोटर गाड़ियों की लेन से ठीक से अलग किया जाए।
बेंच ने कहा कि बिना किसी बड़े निवेश और निर्माण के बस यह सुनिश्चित करें कि पैदल चलने वालों की जगह का सही सीमांकन किया जाए। जहां भी सड़क है, वहां पैदल चलने वालों के लिए जगह होनी चाहिए। इसे रस्सी या किसी और चीज से करें और पक्का करें कि उस पर अतिक्रमण न हो। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। साथ ही जोर दिया कि पैदल चलने वालों को भरोसा होना चाहिए कि यह जगह उनके लिए है और वे चलती गाड़ियों के किसी भी खतरे के बिना आजादी से चल सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की गई है।
इससे पहले 19 जून को एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तय किए गए फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है। कोर्ट ने कहा था कि तय किए गए रास्तों पर मोटर गाड़ियों के मुकाबले इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। यह आर्टिकल 19 (1) (डी) के तहत गारंटी वाले आने-जाने के अधिकार और आर्टिकल 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) समेत दूसरे बुनियादी अधिकारों का हिस्सा है।
