जयपुर। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और पुणे की बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा मंडारे की गिरफ्तारी के बाद NTA की पेपर सेटिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि पेपर सेटर्स की फाइनल प्रश्नपत्र तक पहुंच कैसे बनी और इन शिक्षकों के किन बड़े अधिकारियों से संबंध थे।
मामले में प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी का नाम सबसे चर्चित है। जांच के अनुसार वे 2019 से NTA से जुड़े हुए थे। शुरुआत में सब्जेक्ट एक्सपर्ट के रूप में शामिल किए गए कुलकर्णी की बाद में NEET के कई सेट्स तक पहुंच बन गई। NTA के लिए पांच अलग-अलग पेपर सेट तैयार किए जाते थे, जिनमें से दो अंतिम रूप से चुने जाते थे। कुलकर्णी उन अंतिम चरणों तक पहुंच रखने वालों में शामिल पाए गए। CBI अब यह जांच रही है कि उन्हें NTA में किस अधिकारी ने प्रवेश दिलाया और किन वरिष्ठ अधिकारियों से उनके करीबी संबंध थे।
अंत में यह ज्पुानकारी दे दें कि, पुणे की प्रोफेसर मनीषा गुरुनाथ मंडारे को भी CBI ने गिरफ्तार किया है। वे Modern College of Arts Science and Commerce में बॉटनी की लेक्चरर हैं और पिछले पांच-छह वर्षों से NTA की प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं। CBI उन्हें बायोलॉजी पेपर लीक का मास्टरमाइंड मान रही है। जांच में पता चला कि अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने पुणे की मनीषा वाघमारे के जरिए कुछ चुनिंदा छात्रों को घर बुलाकर स्पेशल क्लास ली, जिसमें परीक्षा में आने वाले सवालों को समझाया गया।
