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यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) को लेकर होने वाली 20वीं अंतर-सरकारी समिति की बैठक न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए भी ऐतिहासिक होने जा रही है। आठ से 13 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रतिष्ठित बैठक का आयोजन दिल्ली के भव्य लाल किले में किया जा रहा है।

फिलहाल, देश की 15 अमूर्त विरासत इस सूची में जगह बनाए हुए हैं। उसमें दुर्गा पूजा, पारसी महोत्सव नवरोज, योग, गरबा, कुंभ मेला, वैदिक मंत्रोच्चार, कलबेलिया नृत्य, वैदिक मंत्रोच्चार, रामलीला व छऊ नृत्य शामिल है। पूर्वांचलवासियों के लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को अगले वर्ष बैठक में रखा जाएगा।

देश में पहली बार यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की बैठक हो रही है। लाल किले का यह आयोजन सरकार के लिए भी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि यह एक ऐसा मंच है जहां भारत की प्राचीन, विविध और जीवंत परंपराओं को दुनिया के सामने विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा।

बता दें कि, इस बैठक के दौरान लाल किले को एक विशाल सांस्कृतिक मंच के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। ऐतिहासिक परिसर में भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक मुखौटों (Masks) की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें राज्यों की संस्कृति, मिथक और लोककथाओं की जीवंत झलक नजर आएगी।

वही, इसके अतिरिक्त, भारतीय हस्तशिल्प (Handicrafts) की भव्य प्रदर्शनी भी होगी। यहां आगंतुकों के लिए आकर्षक और पारंपरिक हस्तशिल्प वस्तुओं की बिक्री की जाएगी। इस प्रदर्शनी में विशेष रूप से UPI आधारित नगद-रहित भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को लेन-देन में आसानी होगी।

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