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ईरान। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमले शुरू किए, जिनका मुख्य उद्देश्य ईरानी सरकार को सत्ता से हटाना था। हमलों के पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई। उनके परिसर पर हमले में परिवार के सदस्यों और कई शीर्ष अधिकारियों की भी जान गई। इसके बाद मोजतबा खामनेई को नए सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया गया। जंग के 10 दिनों में मिडिल ईस्ट में 1700 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें ईरान में 1230 से ज्यादा मौतें हुई हैं। हजारों लोग घायल हुए हैं।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले से 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए। दुबई में एक पाकिस्तानी नागरिक की ड्रोन हमले में मौत हुई। हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ को टॉरपीडो से नष्ट किया, जिसमें 80 से अधिक लोग मारे गए। श्रीलंका ने जहाज से 32 लोगों को बचाया। रविवार को अमेरिका-इजरायल ने तेहरान में 4 तेल रिफाइनरियों और डिपो पर हमला किया, जिससे भीषण आग लगी और आसमान में धुआं छा गया। तेहरान में तेल की बारिश देखी गई।

ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें दागीं, जिससे नागरिक क्षेत्र भी प्रभावित हुए। हिजबुल्लाह ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान की ओर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इजरायल अब लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है। 10वें दिन भी कोई कमी नहीं आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की बिना बिना शर्त समर्पण के कोई समझौता नहीं होगा। सोमवार को ईरान ने दोहा (कतर) और इजरायल पर मिसाइलें दागीं। स्थिति में कोई कमी के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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