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कोलकाता। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में भारतीय चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ जल्द ही कोलकाता पहुंचने वाली है। यह टीम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा करेगी। परंपरा के अनुसार, चुनाव तारीखों की घोषणा से कुछ दिन पहले आयोग की पूरी टीम संबंधित राज्य का दौरा करती है और व्यवस्थाओं का जायजा लेती है।

सूत्रों के अनुसार, आयोग मार्च के मध्य तक चुनावी कैलेंडर घोषित करने की तैयारी में है। तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी से मतदान शुरू हो सकता है, जबकि पश्चिम बंगाल और केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और न्याय प्रक्रिया के कारण चुनाव थोड़ा बाद में होंगे। बंगाल में पिछले चुनावों की तरह 6 से 7 चरणों में मतदान होने की संभावना है। 2021 में कोविड के बीच 8 चरणों में चुनाव हुए थे, जबकि 2016 में 6 चरण थे। इस बार चरणों की संख्या कम करने की उम्मीद थी, लेकिन आंतरिक आकलन से पता चलता है कि 6 से कम चरणों में चुनाव संभव नहीं दिख रहा।

बंगाल चुनाव में दो प्रमुख चुनौतियां हैं – कड़े मुकाबले के लिए आवश्यक उच्च सुरक्षा तैनाती और लंबी एसआईआर प्रक्रिया। राज्य में कानून-व्यवस्था पर कड़ी निगरानी है और 200 से अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियां पहले से तैनात हैं। 60 लाख से अधिक मतदाताओं का नाम अभी भी अधर में है। चुनाव आयोग उच्च स्तरीय विचार-विमर्श कर रहा है और कार्यक्रम 2021 से पहले घोषित हो सकता है, जब 27 फरवरी को तारीखें आई थीं। मई तक पूरी प्रक्रिया खिंच सकती है, क्योंकि नई विधानसभा का गठन 7 मई तक अनिवार्य है।

मार्च के मध्य तक चुनावी कैलेंडर संभव

सूत्रों के अनुसार, आयोग मार्च के मध्य तक चुनावी कैलेंडर घोषित करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस बार भी एक साथ कई राज्यों में चुनाव कराए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, मतदान की शुरुआत तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी से हो सकती है। इसके बाद पश्चिम बंगाल और केरल में चुनाव कराए जाने की संभावना है।

बंगाल और केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और न्यायिक प्रक्रिया के कारण चुनाव कार्यक्रम में कुछ देरी हो सकती है। एसआईआर के तहत मतदाता सूची का गहन सत्यापन किया जाता है, ताकि मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नामों को हटाया जा सके और नई प्रविष्टियां जोड़ी जा सकें। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

6 से 7 चरणों में मतदान की संभावना

पश्चिम बंगाल में चुनाव आमतौर पर कई चरणों में कराए जाते हैं। 2021 में कोविड-19 महामारी के बीच राज्य में 8 चरणों में मतदान हुआ था। वहीं 2016 के विधानसभा चुनाव 6 चरणों में संपन्न हुए थे। इस बार उम्मीद जताई जा रही थी कि चरणों की संख्या घटाई जा सकती है, लेकिन आंतरिक आकलन के मुताबिक 6 से कम चरणों में चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं दिख रहा।

राज्य की भौगोलिक विविधता, बड़ी मतदाता संख्या और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए चरणबद्ध मतदान को आवश्यक माना जाता है। राज्य के कई जिलों को संवेदनशील या अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है, जहां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जरूरत होती है। ऐसे में चरणों की संख्या अधिक होने से सुरक्षा बलों की बेहतर तैनाती और लॉजिस्टिक प्रबंधन संभव हो पाता है।

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