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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (Nipah Virus) के दो मामलों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। ये मामले उत्तर 24 परगना जिले के बरासत में एक प्राइवेट अस्पताल में कार्यरत दो नर्सों (एक पुरुष और एक महिला) के हैं, जो फिलहाल क्रिटिकल कंडीशन में हैं। एक मरीज कोमा में चला गया है, जबकि दूसरा वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे और AIIMS कल्याणी के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (VRDL) में जांच से संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह पश्चिम बंगाल में 19 वर्षों बाद निपाह का रिटर्न है, जिसने 2001 में राज्य में भयानक तबाही मचाई थी, जब 66 मामलों में 45 मौतें हुई थीं।

आपको बताते चले कि, बंगाल सरकार और केंद्र ने तुरंत एक्शन लिया है।जिस पर यूनियन हेल्थ मिनिस्टर जगत प्रकाश नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। केंद्र ने नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम तैनात की है, जो कंटेनमेंट, सर्विलांस और पब्लिक हेल्थ मेजर्स में सहायता कर रही है। पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (PHEOC) एक्टिवेट किया गया है। संक्रमितों के करीब 120 संपर्कों की ट्रेसिंग की गई है, जिनमें से 50 की जांच हो चुकी है।

वही दुसरी ओर , इस स्थिति से झारखंड में भी हाई अलर्ट जारी हो गया है, क्योंकि दोनों राज्य सीमा से जुड़े हैं और लोगों की आवाजाही लगातार होती रहती है। झारखंड में अभी तक कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि पश्चिम बंगाल से हाल में लौटे लोगों की ट्रेवल हिस्ट्री जांचें और संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट मुख्यालय को तुरंत भेजें।

वही, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सभी 24 जिलों में सख्त सर्विलांस, रैपिड रिपोर्टिंग और पब्लिक अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने के आदेश दिए हैं। बॉर्डर जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जहां लोगों की आवाजाही अधिक है। रोकथाम के लिए सरकारी दिशानिर्देशों का पालन जरूरी है: बैट्स या संक्रमित जानवरों (खासकर सूअर) से दूर रहें। आधे खाए फल न खाएं, फलों को अच्छे से धोएं और छीलें। कच्चे खजूर के रस (डेट पाम सैप) से परहेज करें, जो बैट्स से दूषित हो सकता है।

यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है, क्योंकि निपाह का कोई वैक्सीन नहीं है और फैटलिटी रेट बहुत ऊंचा है। केंद्र और राज्य मिलकर कंटेनमेंट पर काम कर रहे हैं। जनता को घबराने की बजाय सतर्क रहना चाहिए। लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं, क्योंकि शुरुआती इलाज से बचाव संभव है। स्वास्थ्य अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं, और कोई नया मामला सामने आने पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा।

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