कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘मंदिर राजनीति’ एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता के न्यू टाउन में ‘दुर्गा आंगन’ नामक सांस्कृतिक परिसर की आधारशिला रखे जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सियासी जंग छिड़ गई है। यह परियोजना न केवल दुर्गा पूजा की यूनेस्को द्वारा दी गई अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता का सम्मान है, बल्कि आगामी 2026 विधानसभा चुनावों में हिंदू मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है।
जानकारी दे दें कि, यह परियोजना ममता बनर्जी की हालिया धार्मिक परियोजनाओं की श्रृंखला में शामिल है। इससे पहले, उन्होंने दीघा में जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन किया, जो 250 करोड़ रुपये की लागत से बना। अब कोलकाता में महाकाल मंदिर की आधारशिला भी रखी जा रही है। जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में इसका शिलान्यास होने की संभावना है। सिलिगुड़ी में भी एक मंदिर परियोजना चल रही है। टीएमसी इसे सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र के रूप में पेश कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी चाल बता रहा है।
वही, बीजेपी ने इस परियोजना पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “ममता बनर्जी की ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना उनकी राजनीति की तरह तुष्टिकरण में डूबी हुई है। यह बंगाली हिंदुओं की आस्था का मजाक है और भक्ति को वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।” बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि मंदिर या मस्जिद बनाना सरकार का काम नहीं है, बल्कि युवाओं को नौकरी देना है।
ममता बनर्जी ने इन आरोपों पर भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं किसी को खुश करने की राजनीति नहीं करती। मैं सच्ची सेक्युलर हूं। जब मैं इफ्तार पार्टी या रोजा दावत में जाती हूं, तो विरोध होता है। अब दुर्गा आंगन बनवा रही हूं, तो भी सवाल उठाए जा रहे हैं।” उन्होंने जोर दिया कि वह हर धर्म के कार्यक्रमों में शामिल होती हैं और बंगाल की सौहार्दपूर्ण संस्कृति को बनाए रखना चाहती हैं।
कुल मिलाकर, 2026 चुनावों में मंदिर राजनीति निर्णायक भूमिका निभा सकती है। अगर टीएमसी हिंदू वोटों को साधने में सफल रही, तो ममता की सत्ता बरकरार रह सकती है। लेकिन बीजेपी के आक्रामक अभियान और ध्रुवीकरण से मुकाबला कड़ा होगा। राज्य की जनता विकास, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देगी, लेकिन धार्मिक प्रतीक चुनावी नैरेटिव को प्रभावित करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा कितना कारगर साबित होता है।
