कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार होगा, जिनके नाम ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर कर दिए गए हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान नाम हटाए गए मतदाताओं की अपील पर ट्रिब्यूनल के फैसले के आधार पर ही मताधिकार तय होगा।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल द्वारा नाम मंजूर किए गए मतदाता पहले चरण के चुनाव में वोट डाल सकेंगे। वहीं, 27 अप्रैल तक क्लियर होने वाले मतदाताओं को दूसरे चरण में मतदान का अधिकार मिलेगा। अगर ट्रिब्यूनल तय समय के बाद भी किसी अपील को मंजूर करता है, तो उस व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जा सकता है, लेकिन फैसला आने तक मतदान की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने लंबित अपील वाले लोगों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। पीठ ने कहा कि लंबित अपील वालों को वोटिंग की अनुमति देने से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। ट्रिब्यूनल पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती। कोर्ट ने माना कि वोट का अधिकार लोकतंत्र का आधार है, लेकिन लंबित मामलों में राहत देना उचित नहीं होगा।
SIR प्रक्रिया के दौरान बंगाल में लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे, जिसके खिलाफ 34 लाख से अधिक अपीलें दायर की गई हैं। कई अपीलें अभी भी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित लोगों से कहा है कि वे अपनी अपील ट्रिब्यूनल में ही जारी रखें और फैसले का इंतजार करें।
