नई दिल्ली।खरीफ सीजन शुरू होने के साथ धान की बुवाई का समय आ गया है। धान को खरीफ की प्रमुख फसल माना जाता है, लेकिन इसमें पानी की अधिक खपत एक बड़ी समस्या रही है। कई राज्यों में भूजल स्तर गिरने और कम बारिश के कारण किसान चिंतित रहते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके अपनाकर, सही किस्म चुनकर और सिंचाई का उचित प्रबंधन करके कम पानी में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
जानकारी दे दें कि, हरियाणा समेत कई राज्यों में किसान पारंपरिक रोपाई की जगह धान की सीधी बुवाई की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार इस विधि से करीब 30 प्रतिशत पानी की बचत होती है। सीधी बुवाई में नर्सरी तैयार करने, मजदूरी और बार-बार जुताई का खर्च भी कम हो जाता है। इससे जमीन की संरचना पर कम असर पड़ता है और मीथेन गैस का उत्सर्जन भी घटता है।
अंत में बता दें कि, कम पानी में बेहतर उत्पादन के लिए सही वैरायटी का चयन जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक 1509, पीबी 1692, वीएनआर 2111, अभिनव, आरएस 100 और सिजेंटा 9001 जैसी किस्में कम सिंचाई में अच्छा उत्पादन देती हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए सुधा, वैदेही, जलमग्न और जलहरी जैसी किस्में उपयुक्त बताई जाती हैं।
