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नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के फ्रेमवर्क ने भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत की खबर लाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी कर भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ को वापस लेने का फैसला किया है। यह टैरिफ अगस्त 2025 में लगाया गया था, जिसके कारण भारतीय वस्तुओं पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब यह पेनल्टी हटने से प्रभावी टैरिफ दर 18 प्रतिशत रह जाएगी।

व्हाइट हाउस से जारी संयुक्त बयान और कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात को रोकने या सीमित करने की प्रतिबद्धता जताई है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा। इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि भारत रूसी तेल खरीद फिर शुरू करता है, तो 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ दोबारा लगाया जा सकता है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) भारतीय ऊर्जा आयात की निगरानी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर टैरिफ बहाल करने की सिफारिश करेगा।

इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ भारतीय कारोबारियों को मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस पेनल्टी टैरिफ की वापसी से भारतीय निर्यातकों को लगभग ₹40 हजार करोड़ की राहत मिलने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 27 अगस्त 2025 से 6 फरवरी 2026 के बीच अमेरिका में आयातित भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए इस अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ का रिफंड दिया जाएगा। यह रिफंड अमेरिका के कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) कानून के तहत प्रक्रिया के माध्यम से होगा।

गौरतलब हैं कि, यह समझौता फरवरी 2025 में शुरू हुई व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) वार्ताओं का परिणाम है। 6 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने पारस्परिक और संतुलित व्यापार पर सहमति जताई। भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म या कम करेगा और अमेरिकी कृषि उत्पादों (जैसे DDGs, सोयाबीन ऑयल, फल, वाइन आदि) पर बाजार पहुंच बढ़ाएगा। अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 18 प्रतिशत तक सीमित किया है, जिसमें कई क्षेत्रों (जैसे जेनेरिक दवाएं, जेम्स एंड डायमंड्स, एयरक्राफ्ट पार्ट्स) पर टैरिफ जीरो करने का प्रावधान है।

हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। रूसी तेल पर निर्भरता कम करने से ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, क्योंकि रूसी तेल सस्ता उपलब्ध था। अमेरिका से महंगे आयात से लागत बढ़ सकती है। लेकिन कुल मिलाकर, यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अंतिम समझौता मार्च तक होने की संभावना है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहेगा।

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