अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में तेजी, जंगी बेड़े की तैनाती और वाशिंगटन से आ रहे सख्त संकेतों के बीच यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला कर सकता है? हालिया घटनाक्रमों ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।
इस कड़ी में राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि, अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में ईरान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) के जोन में आ चुका है। साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पहुंच गया है।USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 18 जनवरी को यह मलक्का स्ट्रेट पार कर हिंद महासागर में दाखिल हुआ।
ट्रम्प प्रशासन के सैन्य विकल्पों पर विचार
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ट्रम्प ने ऐसे विकल्पों की मांग की है, जिनका असर “निर्णायक” हो। इसका मतलब यह है कि अमेरिका किसी सीमित कार्रवाई के बजाय ऐसे कदमों पर विचार कर रहा है, जो ईरान की सैन्य और राजनीतिक क्षमता पर बड़ा प्रभाव डाल सकें।
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि अमेरिका ईरान पर हमला करेगा या नहीं, लेकिन हालिया घटनाक्रमों से यह साफ है कि तनाव अपने चरम पर है। USS अब्राहम लिंकन की तैनाती, पेंटागन की तैयारियां और ईरान की तीखी चेतावनियां इस ओर इशारा करती हैं कि हालात बेहद नाजुक हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह शक्ति प्रदर्शन कूटनीतिक दबाव तक सीमित रहता है या फिर मिडिल ईस्ट एक नए संघर्ष की ओर बढ़ता है।
