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नई दिल्ली।फार्महाउस में चाय की खेती कर अच्छी कमाई की जा सकती है। आमतौर पर चाय की खेती असम या दार्जिलिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़ी मानी जाती है, लेकिन नई कृषि तकनीकों से अब फार्महाउस पर भी इसे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। एक बार लगाए गए चाय के पौधे लगभग 40-50 वर्षों तक पैदावार देते रहते हैं।

चाय की खेती शुरू करने के लिए हल्की अम्लीय मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसका पीएच मान 4.5 से 5.5 के बीच होना चाहिए। पौधों को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, लेकिन जड़ों में पानी न रुके इसके लिए अच्छा जल निकास वाला क्षेत्र चुनना आवश्यक है। चाय के पौधों को तेज धूप से बचाने के लिए नीम या शीशम जैसे छायादार पेड़ लगाए जा सकते हैं। शुरुआत में सरकारी नर्सरी से उन्नत किस्म के पौधे या क्लोन लाए जा सकते हैं। ग्रीन टी या हर्बल टी की वैरायटी भी फार्महाउस के लिए उपयुक्त हो सकती है।

खेती के साथ स्थायी आय का विकल्प

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सही योजना के साथ चाय की खेती करें तो फार्महाउस से हर साल 3 से 5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय हासिल की जा सकती है। चूंकि चाय के पौधे लंबे समय तक उत्पादन देते हैं, इसलिए यह स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकती है।

आने वाले समय में ऑर्गेनिक खेती, प्राकृतिक उत्पादों और ग्रामीण पर्यटन की बढ़ती मांग को देखते हुए फार्महाउस में चाय की खेती किसानों और निवेशकों के लिए एक नया और लाभदायक विकल्प बनकर उभर सकती है।

तीन साल बाद शुरू होती है तुड़ाई

चाय के पौधों को लगाने के बाद शुरुआती दो से तीन वर्षों तक विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लगभग तीन साल बाद पौधों की पत्तियां तुड़ाई के लिए तैयार होने लगती हैं। इसके बाद नियमित अंतराल पर पत्तियों की तुड़ाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक हाथ से चुनी गई चाय की गुणवत्ता अधिक अच्छी मानी जाती है। इसी वजह से हैंड-पिक्ड ऑर्गेनिक टी की बाजार में काफी ऊंची कीमत मिलती है। अच्छी ब्रांडिंग और पैकेजिंग के जरिए किसान अपनी चाय को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाकर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

आने वाले समय में ऑर्गेनिक खेती, प्राकृतिक उत्पादों और ग्रामीण पर्यटन की बढ़ती मांग को देखते हुए फार्महाउस में चाय की खेती किसानों और निवेशकों के लिए एक नया और लाभदायक विकल्प बनकर उभर सकती है।

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