नई दिल्ली। सोने और चांदी के बाजार में पिछले 24 घंटों में ऐसी भयंकर गिरावट देखने को मिली है कि निवेशकों के होश उड़ गए हैं। जहां गुरुवार को चांदी ने एमसीएक्स पर 4 लाख 20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था, वहीं शुक्रवार को यह अचानक 85,000 रुपये तक सस्ती हो गई। इसी तरह सोने के भाव में भी 20,000 से 25,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट इतनी तेज और अचानक थी कि बाजार में ‘बुलबुला फूटने’ की चर्चा छिड़ गई है।
याद दिला दें कि, बीते कुछ दिनों से सोना और चांदी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे थे। निवेशकों के बीच यह धारणा बन गई थी कि महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते कीमती धातुओं की कीमतें और ऊपर जाएंगी। लेकिन अचानक बाजार की दिशा बदली और तेज मुनाफावसूली के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स के असर से बुलियन मार्केट में भारी दबाव देखने को मिला।गुरुवार को चांदी ने वायदा बाजार में नया इतिहास रच दिया था। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गया था। यह चांदी का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा था। निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और कई लोगों ने इसे चांदी के लिए “सुपर बुल रन” करार दिया।
गौर करते चले कि, यह गिरावट गुरुवार के रिकॉर्ड हाई के ठीक बाद आई है। गुरुवार को चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंची थी, जबकि सोना 1.80 लाख से 1.83 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक छू गया था। जनवरी 2026 में चांदी ने 65% से ज्यादा की छलांग लगाई थी, जो पिछले कई दशकों में सबसे तेज मासिक बढ़त थी। सोने ने भी रिकॉर्ड स्तर छुए थे। लेकिन शुक्रवार को मुनाफा वसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने बाजार को पटरी से उतार दिया।
मिली जानकारी केअनुभासार रतीय बाजार में यह प्रभाव और तेज रहा क्योंकि रुपये पर भी दबाव था। हालांकि रुपये की स्थिति स्थिर रही, लेकिन वैश्विक संकेतों से एमसीएक्स पर भारी बिकवाली हुई। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे प्रमुख सर्राफा बाजारों में चांदी 3.80-3.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि सोना 1.65-1.69 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था। कुछ शहरों में सोना 24 कैरेट 1.69 लाख रुपये पर था, लेकिन गिरावट जारी रही।
यह गिरावट कितनी लंबी चलेगी? विशेषज्ञों के अनुसार, अल्पकालिक में और सुधार संभव है, लेकिन लंबी अवधि में सोना-चांदी मजबूत बने रहेंगे। चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत है, जबकि सोना मुद्रास्फीति और अनिश्चितता के खिलाफ हेज बना रहेगा। कई एनालिस्ट ‘बाय ऑन डिप’ की सलाह दे रहे हैं, यानी गिरावट पर खरीदारी का मौका मान रहे हैं। लेकिन वोलेटिलिटी बनी रहेगी, क्योंकि फेड की नीति, ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और वैश्विक इकोनॉमी के संकेत महत्वपूर्ण होंगे।
