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नई दिल्ली। दुनिया के व्यापारिक परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ आज देखने को मिल सकता है, जब भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगने की घोषणा होने जा रही है। इसे ‘Mother of All Deals’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह न केवल आकार और दायरे में व्यापक है, बल्कि वैश्विक टैरिफ तनाव के दौर में भारत की रणनीतिक जवाबी चाल भी मानी जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ अटैक का करारा जवाब मिलने वाला है. भारत और ईयू के बीच ‘Mother Of All Deals’ का आज ऐलान होगा डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर दुनियाभर के देशों को टैरिफ की नई धमकियां (Donald Trump Tariff Warnings) देते हुए डराने में लगे हुए हैं।

क्या है India-EU FTA और क्यों अहम है?

भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA का उद्देश्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई देना है। यूरोपीय संघ भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जबकि भारत EU के लिए तेजी से उभरता बड़ा बाजार है। इस समझौते के तहत टैरिफ में चरणबद्ध कटौती, बाजार पहुंच में सुधार, सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा, निवेश संरक्षण और सप्लाई-चेन सहयोग जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह डील निर्यात-आयात को सरल बनाएगी और कारोबारी लागत घटाने में मदद करेगी।

डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संभावित टैरिफ सख्ती की चर्चाओं ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में भारत-EU FTA एक वैकल्पिक और भरोसेमंद व्यापार मार्ग खोलता है। यह डील संकेत देती है कि भारत एकतरफा दबाव के बजाय नियम-आधारित, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को तरजीह देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत की सौदेबाजी की क्षमता मजबूत होगी और वह वैश्विक टैरिफ झटकों से खुद को बेहतर ढंग से सुरक्षित रख पाएगा।

ndia-EU FTA को केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है। बदलते भू-राजनीतिक माहौल में यह डील भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करती है और यह संदेश देती है कि भारत खुले, नियम-आधारित और टिकाऊ व्यापार के पक्ष में खड़ा है। अगर क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो यह समझौता भारत की आर्थिक वृद्धि, निर्यात विविधीकरण और वैश्विक सप्लाई-चेन में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने में निर्णायक साबित हो सकता है।

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