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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच शुक्रवार (7 फरवरी 2026) को अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement – ITA) का फ्रेमवर्क जारी किया गया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगे कई टैरिफ में बड़ी कटौती की है और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी पूरी तरह हटा दिया है। दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि यह फ्रेमवर्क जल्द ही लागू किया जाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) की दिशा में वार्ताएं तेज होंगी।

समझौते के प्रमुख प्रावधानों में अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना शामिल है। साथ ही, रूस से तेल आयात पर लगे 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटाया गया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति के लिए राहत की बात है। भारत ने भी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म करने या काफी कम करने का वादा किया है। इसमें कृषि उत्पाद जैसे ट्री नट्स (बादाम, अखरोट), ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), रेड सोरघम (लाल ज्वार), ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन आदि प्रमुख हैं।

दोनों देशों ने नॉन-टैरिफ बैरियर्स (NTBs) को दूर करने पर विशेष जोर दिया है। ये बैरियर्स टैरिफ नहीं होते, लेकिन व्यापार को जटिल बनाते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियां भारत में कीमत निर्धारण नियमों, रजिस्ट्रेशन में देरी और अन्य प्रक्रियाओं से प्रभावित होती रहीं हैं। भारत ने इन बाधाओं को हटाने का वादा किया है, जिससे अमेरिकी मेडिकल डिवाइस आसानी से उपलब्ध होंगे और भारतीय अस्पतालों तथा मरीजों को उन्नत तकनीक सस्ते दामों पर मिल सकेगी।

नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने पर जोर

इस समझौते का एक अहम हिस्सा नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करना भी है। ये ऐसी रुकावटें होती हैं जो सीधे टैक्स से जुड़ी नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बना देती हैं।

उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियमों और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है। भारत ने इन बाधाओं को दूर करने का वादा किया है, ताकि अमेरिकी मेडिकल उपकरणों की बिक्री आसान हो सके। इससे भारतीय अस्पतालों और मरीजों को बेहतर तकनीक और संभावित रूप से किफायती उपकरण मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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