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नई दिल्ली। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर संदेह व्यक्त किया है। एएनआई से बात करते हुए अजार ने कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में नहीं देखता। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”

रूवेन अजार ने बताया कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली सेवाओं का उपयोग करने का फैसला किया है। उन्होंने जोर दिया कि इजरायल का मुख्य मकसद दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करना है। यह ईरान में चल रहे ऑपरेशन से अलग मुद्दा है। अजार ने कहा कि लेबनानी सरकार को भी इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

इजरायली राजदूत ने लेबनान में हालिया कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले कुछ घंटों में इजरायल ने पूरे लेबनान में 250 से ज्यादा हिज्बुल्लाह आतंकवादियों को मार गिराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले साल तय की गई संघर्ष-विराम की शर्तों को हर हाल में बनाए रखा जाएगा और लिटानी नदी के दक्षिण में हिज्बुल्लाह की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ईरान के साथ संघर्ष-विराम पर बात करते हुए अजार ने उम्मीद जताई कि वार्ता से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। उन्होंने कहा कि इजरायल इस सीजफायर का पूरी तरह समर्थन करता है। इस दौरान ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन रोकना चाहिए। अजार ने बताया कि अमेरिका की अगुवाई में बातचीत का दौर शुरू होने वाला है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने इजरायल पर अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे दो हफ्ते के संघर्ष-विराम समझौते को खतरे में डालने का आरोप लगाया था। ईरान ने चेतावनी दी कि लेबनान पर इजरायली हमलों से समझौता टूट सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया कि लेबनान इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है।

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