नई दिल्ली। झारखंड राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के राजनीतिक दोहरे मापदंडों को सामने ला दिया है। इन घटनाओं ने राजनीतिक दलों में अपने और विरोधी पक्ष के विधायकों के प्रति अलग-अलग रवैये को उजागर किया।
झारखंड में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक थे, लेकिन उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के लिए 30 विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया। वहीं, इंडी गठबंधन के पास कुल 56 सीटें थीं, जो दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त थीं। परंतु कांग्रेस उम्मीदवार को मात्र 20 वोट ही मिले, जिससे उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
कर्नाटक में कांग्रेस के पास 135 विधायक थे, जबकि बीजेपी के पास 64। MLC चुनाव में कांग्रेस को 151 वोट मिले। दूसरी ओर, बीजेपी के दो उम्मीदवारों को 56 वोट मिले, जो आठ वोट कम थे। बीजेपी की सहयोगी जेडीएस के पास 18 विधायक थे, लेकिन उसके उम्मीदवार को मात्र 14 वोट मिले। इससे कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
दोनों दलों ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया। झारखंड में बीजेपी ने पाला बदलने वाले विधायकों का स्वागत किया, जबकि कर्नाटक में गद्दारी करने वालों की जांच शुरू कर दी। कांग्रेस ने झारखंड में पैसे के इस्तेमाल का आरोप लगाया, लेकिन कर्नाटक में क्रॉस वोटिंग को अंतरात्मा की आवाज बताया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नतीजों को कांग्रेस सरकार पर भरोसे का प्रतीक बताया और समर्थन करने वाले विधायकों का शुक्रिया अदा किया। झारखंड में बीजेपी नेताओं ने इसे एनडीए के विकास एजेंडे पर जनता के भरोसे के रूप में देखा।
