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लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक तीन मंजिला शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई। कॉम्प्लेक्स में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। एंट्री-एग्जिट के लिए केवल एक संकरा रास्ता था, जिसके ऊपर 7 पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन और इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल लगाए गए थे। बेसमेंट सहित बने इस कॉम्प्लेक्स में इमरजेंसी गेट नहीं था।

आग लगने पर दूसरी मंजिल पर फंसे लोगों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। कॉम्प्लेक्स रिहायशी इलाके में रेजिडेंशियल नक्शा पास कराकर कमर्शियल रूप से बनाया गया था। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आईएएस अमृत अभिजात और आईपीएस प्रवीण कुमार की अगुवाई में एसआईटी गठित की गई है।

एलडीए, बिजली विभाग और फायर विभाग के कुल चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने पांच सदस्यीय विशेष टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लापरवाही बरतने वाले एलडीए के एई और जेई को भी निलंबित किया गया है।राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता प्रदान की है। विधायक नीरज बोरा ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर पीड़ित परिवारों को यह राशि सौंपी। सरकार ने घायलों के बेहतर उपचार और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा भी दिया है।

एक ही रास्ता बना सबसे बड़ी वजह

जांच में सामने आया है कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा रास्ता था। यही रास्ता आग लगने के दौरान लोगों के लिए सबसे बड़ी बाधा साबित हुआ। स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि इसी रास्ते के ऊपर सात पैनल, दो बड़े एग्जॉस्ट फैन और एक इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल लगाया गया था।

बताया जा रहा है कि आग फैलने के बाद धुआं और गर्मी सबसे पहले इसी हिस्से में भर गई, जिससे बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। दूसरी मंजिल पर मौजूद लोग सुरक्षित बाहर नहीं निकल सके और कई लोग धुएं तथा आग की चपेट में आ गए।

लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी विकास, भवन निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि यदि निर्माण के समय निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और समय-समय पर प्रभावी निरीक्षण होता, तो इस तरह की बड़ी जनहानि से बचा जा सकता था।

अब पूरे प्रदेश में व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी, अवैध निर्माण और रिहायशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एसआईटी की जांच और विभागीय कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इस दुखद हादसे के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भवन सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन और नियमित निरीक्षण अत्यंत आवश्यक है।

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