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नई दिल्ली।नौतपा के दौरान आसमान से बरसती आग और 45 डिग्री पार करने वाली भीषण गर्मी खेतों में खड़ी फसलों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। तेज धूप और चिलचिलाती लू से फसलें झुलसने लगती हैं। ऐसी स्थिति में पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान अपनी मेहनत को बचाने में सफल हो सकते हैं।

सिंचाई का सही समय और तरीका
इस गर्मी में फसलों को पानी देने का समय बेहद महत्वपूर्ण है। दोपहर की तेज धूप में सिंचाई करने से बचना चाहिए क्योंकि पानी जल्दी भाप बनकर उड़ जाता है और जड़ें गर्म हो सकती हैं। इसके बजाय सुबह जल्दी या शाम को सूरज ढलने के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। इससे मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है। ड्रिप इरिगेशन या स्प्रिंकलर सिस्टम का उपयोग कम पानी में जड़ों तक नमी पहुंचाने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है।

क्या होता है नौतपा?

भारतीय पंचांग और मौसम विज्ञान के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब लगभग नौ दिनों तक अत्यधिक गर्मी पड़ती है। इसी अवधि को नौतपा कहा जाता है। माना जाता है कि इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर अधिक प्रभाव डालती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इस समय सूर्य की स्थिति और वातावरण में नमी की कमी के कारण धरती का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है।

हालांकि नौतपा को कृषि के लिए पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जाता। कई कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि यह अवधि मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीटों और रोगाणुओं को कम करने में भी मदद करती है। लेकिन यदि तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाए, तो यह फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

नौतपा के दौरान यदि किसान समय रहते सही उपाय अपनाएं तो फसलों को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। सिंचाई का सही प्रबंधन, मल्चिंग, जैविक पोषण और खेतों की सुरक्षा व्यवस्था जैसे छोटे-छोटे कदम किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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