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नई दिल्ली: खेती में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पारंपरिक रूप से केमिकल कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है, लेकिन अब जैविक और सुरक्षित खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। ऐसे में फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap) कीट नियंत्रण का एक स्मार्ट और असरदार विकल्प बनकर उभरा है। यह ट्रैप कीटों को पकड़ने के साथ-साथ फसलों की निगरानी और नियंत्रण में भी मदद करता है।

फेरोमोन ट्रैप एक खास उपकरण है जिसमें फेरोमोन नामक केमिकल लगाया जाता है। यह वही गंध है जो मादा कीट अपने आसपास छोड़ती हैं, जिससे नर कीट आकर्षित होते हैं। ट्रैप में यह गंध फैलती है और नर कीट ट्रैप की ओर खिंचे चले आते हैं। पहुंचने पर वे फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते, जिससे कीटों की संख्या पर नियंत्रण रहता है और उनका प्रजनन रुक जाता है।

ट्रैप कैसे काम करता है?
ट्रैप में विशेष ल्यूर लगाया जाता है जो हवा में फैलकर नर कीटों को आकर्षित करता है। कीट ट्रैप के पास आकर फंस जाते हैं। किसान ट्रैप की नियमित जांच करके यह जान सकते हैं कि खेत में कितने और किस प्रकार के कीट सक्रिय हैं। इससे समय रहते कीट नियंत्रण के उपाय किए जा सकते हैं और भारी नुकसान से बचा जा सकता है।

लाभ और उपयोग
फेरोमोन ट्रैप से कीटों की सही समय पर पहचान होती है, जिससे कीटनाशकों का उपयोग केवल जरूरत पर ही करना पड़ता है। यह मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित नहीं करता तथा फायदेमंद कीटों और मधुमक्खियों को नुकसान नहीं पहुंचाता। एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक निगरानी की जा सकती है, खर्च कम होता है और समय बचता है। जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए यह खासतौर पर उपयोगी है, क्योंकि इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उपज बढ़ती है।

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