नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स में 600 से अधिक अंकों या 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी में 0.7 प्रतिशत तक की गिरावट हुई। निफ्टी 24,000 के समर्थन स्तर से थोड़ा ऊपर बना रहा। आईटी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव बना।
एचसीएलटेक, इंफोसिस, सिप्ला, टीसीएस और डॉ. रेड्डीज ब्लू-चिप इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे। इंफोसिस के शेयर एनएसई पर 3.72 प्रतिशत गिरकर 1,194.50 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गए। कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के लिए समेकित शुद्ध लाभ में 21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 7,033 करोड़ रुपये की तुलना में 8,501 करोड़ रुपये रहा। इंफोसिस के एडीआर भी 4 प्रतिशत नीचे बंद हुए।
एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखा गया। एमएससीआई एशिया पैसिफिक इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ। जापान का निक्केई 225 0.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 0.4 प्रतिशत ऊपर रहा। वहीं दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.6 प्रतिशत, हैंग सेंग 0.2 प्रतिशत और सीएसआई 300 0.8 प्रतिशत गिर गया। इजरायल-लेबनान युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाए जाने के बावजूद निवेशक सतर्क बने रहे।
ईरान युद्ध से जुड़ी ऊर्जा चिंताओं के कारण तेल की कीमतों में लगातार पांचवें दिन तेजी आई, जो जनवरी के बाद सबसे लंबी तेजी का सिलसिला है। ब्रेंट क्रूड जून डिलीवरी 1.1 प्रतिशत बढ़कर 106.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि साप्ताहिक वृद्धि लगभग 17 प्रतिशत रही। डब्ल्यूटीआई जून डिलीवरी 0.96 प्रतिशत बढ़कर 96.77 डॉलर पर कारोबार कर रही थी। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 10 पैसे गिरकर 94.21 पर खुला।
