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इंदौर। इंदौर जो लगातार आठ वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण में देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना जा रहा है, इन दिनों एक गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। दूषित पानी पीने के कारण शहर के 15 लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में लोग अभी भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

शहर के भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की पेयजल आपूर्ति लाइन में सीवर का पानी मिल जाने से डायरिया, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियों का तेज प्रसार हुआ है। स्थानीय निवासियों और कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,800 से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। अस्पतालों में 270 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है।

प्रभावित क्षेत्र मुख्य रूप से भागीरथपुरा है, जहां लगभग 15,000 लोग रहते हैं। पानी के सेवन से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर डिहाइड्रेशन हुआ। मृतकों में एक 6 महीने का मासूम बच्चा अव्यान भी शामिल है, जो 10 वर्षों की प्रार्थना के बाद पैदा हुआ था। परिवार ने सरकारी मुआवजे को ठुकरा दिया और कहा कि पैसे से बच्चा वापस नहीं आएगा। अन्य मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बुजुर्ग हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में पानी के सैंपलों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और विब्रियो कोलेरी (हैजा का जीवाणु) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। लैब टेस्ट में 50 सैंपलों में से 26 दूषित पाए गए।

गौरतलब हैं कि, पुरानी शिकायतें और लापरवाही की बातें भी सामने आई हैं। 2016-18 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 60 सैंपलों में से 59 फेल पाए थे, जिसमें कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया था। बोर्ड ने नगर निगम को तीन बार चेतावनी दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 2025 में ही 266 पानी गुणवत्ता शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें जोन-4 (भागीरथपुरा) में 23 शामिल थे।

बता दें कि, इस घटना पर राजनीतिक हलचल भी तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इसे प्रदेश, सरकार और व्यवस्था के लिए कलंक बताया और कहा कि घोर प्रायश्चित करना होगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पानी नहीं, जहर बांटा जा रहा है और प्रशासन सोया हुआ था। एनएचआरसी ने मुख्य सचिव से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है, जहां मरीजों को मुफ्त इलाज का निर्देश दिया गया।

जानकारी दे दें कि, प्रभावित परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की गई है। नगर निगम ने सफाई अभियान चलाया, टैंकरों से पानी बांटा और क्लोरीन टैबलेट वितरित की। स्थिति अभी गंभीर है, लेकिन सरकार के कदमों से राहत की उम्मीद है। यह घटना बुनियादी सुविधाओं, रखरखाव और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। उम्मीद है कि इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकेंगी

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