नई दिल्ली। किचन गार्डन में पौधे लगाना आसान है लेकिन उन्हें हरा-भरा रखने के लिए सही पोषण भी जरूरी है। बाजार से हर बार खाद खरीदने के बजाय घर के किचन वेस्ट से अच्छी खाद तैयार की जा सकती है। इससे पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और घर का गीला कचरा भी बेकार नहीं जाता।
सब्जियों के छिलकों से खाद बनाई जा सकती है। आलू, गाजर, लौकी, कद्दू समेत कई सब्जियों के छिलके काम आ सकते हैं। इन्हें सीधे गमले में डालने के बजाय पहले सुखाकर छोटे टुकड़ों में करें और फिर मिट्टी में मिलाएं। इससे धीरे-धीरे जैविक पदार्थ बढ़ता है और मिट्टी की क्वालिटी बेहतर होती है। नमक या मसाले वाले कचरे को इसमें शामिल न करें।
जानकारी दे दें कि, केले के छिलकों में पोटैशियम और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर धूप में सुखा लें। पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें पीसकर पाउडर बना सकते हैं। इस पाउडर की थोड़ी मात्रा गमले की मिट्टी में मिलाने से पौधों को पोषण देने में मदद मिल सकती है। रोज घर में बचने वाली इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को भी फेंकने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले चायपत्ती को पानी से अच्छी तरह धो लें जिससे दूध और चीनी निकल जाए। इसके बाद इसे धूप में सुखाएं। सूखने के बाद थोड़ी मात्रा मिट्टी में मिलाई जा सकती है।
वही यह भी बताते चले कि, अंडे के छिलकों को धोकर अच्छी तरह सुखाएं। इसके बाद मिक्सर में बारीक पीस लें। तैयार पाउडर को थोड़ी मात्रा में गमले की ऊपरी मिट्टी में मिलाया जा सकता है। अंडे के छिलकों में कैल्शियम होता है जो पौधों के पोषण में काम आ सकता है। सूखी पत्तियां भी कंपोस्ट तैयार करने के लिए बढ़िया हैं। एक बाल्टी या डिब्बे में सूखी पत्तियां, थोड़ी मिट्टी और जैविक कचरे की परत लगाएं। इसमें नमी बनाए रखें लेकिन पानी जमा न होने दें। समय के साथ यह सामग्री सड़कर कंपोस्ट में बदलने लगती है। तैयार कंपोस्ट को गमलों की मिट्टी में मिलाने से मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनाने में मदद मिलती है।
अंत में बता दें कि, इन घरेलू खादों का इस्तेमाल करते समय मात्रा जरूरत के हिसाब से ही रखें। ज्यादा खाद डालने से पौधे को नुकसान हो सकता है। खासकर गमलों में मिट्टी की मात्रा कम होती है इसलिए थोड़ी मात्रा से शुरुआत करना बेहतर रहता है। अगर कई गमले हैं तो हर पौधे के लिए एक जैसी खाद इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। पौधे की जरूरत, मिट्टी और उसकी ग्रोथ देखकर खाद का चुनाव करें। किचन गार्डनिंग का सबसे बड़ा फायदा यही है कि छोटी जगह में भी घर की जरूरत की कई चीजें उगाई जा सकती हैं और जैविक कचरे को सही तरीके से इस्तेमाल करने पर वह पौधों के लिए काम की खाद में बदल सकता है।
