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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली भारत में पारंपरिक फसलों की लागत बढ़ने के बाद किसानों ने बागवानी और नकदी फसलों की ओर रुख किया है। इनमें कमल की खेती भी शामिल है। पहले कमल सिर्फ प्राकृतिक तालाबों या झीलों में उगता था, लेकिन अब किसान आधुनिक तकनीक से अपने खेतों में इसे उगा रहे हैं। कमल ऐसी फसल है जिसका हर हिस्सा—फूल, पत्तियां, जड़ और बीज—बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है।

इस कड़ी में बता दें कि, कमल की खेती के लिए खेत को छोटे तालाब जैसा बनाना पड़ता है। इसके लिए चिकनी या दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जो लंबे समय तक पानी रोक सके। खेत के चारों तरफ 3 से 4 फीट ऊंची और मजबूत मेड़ बनाई जाती है। फिर खेत को करीब 1.5 से 2 फीट गहरा खोदा जाता है। गोबर की खाद और जैविक उर्वरक डालने के बाद 1 से 1.5 फीट पानी भरा जाता है। मिट्टी जब पूरी तरह कीचड़ का रूप ले लेती है, तब रोपाई के लिए तैयार हो जाती है।

वही यह भी बताते चले कि, रोपाई बीजों से भी हो सकती है, लेकिन कंद द्वारा खेती सबसे सफल मानी जाती है क्योंकि इससे पौधे जल्दी तैयार होते हैं। रोपाई का सही समय फरवरी से अप्रैल के बीच है, जब मौसम में हल्की गर्माहट होती है। फसल को ज्यादा कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ खेत में पानी का स्तर 1 फीट बनाए रखना होता है। रोपाई के 3 से 4 महीने बाद फूल आने शुरू हो जाते हैं।

जानकारी देते चले कि, कमल के फूल धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों खासकर दीवाली और शादियों में भारी मांग रखते हैं। एक फूल बाजार में 10 से 25 रुपये तक बिक जाता है। इसकी जड़ों का उपयोग सब्जी और अचार बनाने में होता है, जिनकी कीमत 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक होती है। फूल झड़ने के बाद बचे बीजों को कमल गट्टा कहते हैं। इनका उपयोग पूजा-पाठ, दवाइयां बनाने और भूनकर मखाना तैयार करने में होता है, जिसकी वैश्विक बाजार में मांग है।

आखिर में बता दे कि, एक एकड़ खेत में कमल की खेती शुरू करने पर खेत की खुदाई, कंद खरीदने और मजदूरी मिलाकर करीब 35,000 से 50,000 रुपये की लागत आती है। एक एकड़ से सालभर में लगभग 30,000 से 40,000 कमल के फूल प्राप्त किए जा सकते हैं। फूलों, कमल ककड़ी और बीजों को मिलाकर सभी खर्चे निकालने के बाद एक एकड़ से किसान सालभर में 3.5 लाख से 5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।

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