समाचार मिर्ची

मुंबई। मुंबई की ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में मेयर का चुनाव अब राजनीतिक गठबंधन की नई परीक्षा बन चुका है। 227 वार्ड वाली एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता होती है। हाल ही में संपन्न हुए बीएमसी चुनावों में महायुति गठबंधन (बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना) ने कुल 118 सीटें हासिल की हैं, जिसमें बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं और शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। यह परिणाम महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत देता है, क्योंकि लगभग 30 वर्षों से ठाकरे परिवार का इस निकाय पर कब्जा था, जो अब समाप्त हो गया है।

शिंदे गुट ने 50-50 पावर शेयरिंग फॉर्मूला प्रस्तावित किया है। इसका मतलब है कि मेयर का कार्यकाल ढाई-ढाई साल बांटा जाए – पहले ढाई साल एक पार्टी का और अगले ढाई साल दूसरी का। यह मांग बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पार्टी खुद को सबसे मजबूत स्थिति में देख रही है। हालांकि, गठबंधन की मजबूती बनाए रखने के लिए समझौता जरूरी हो सकता है। शिंदे गुट के नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनकी 29 सीटें गठबंधन की सफलता का आधार हैं, इसलिए मेयर पद पर उनका दावा स्वाभाविक है।

एकनाथ शिंदे ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुंबईकरों ने विकास को चुना और ठाकरे बंधुओं को जवाब दिया। उन्होंने महायुति की एकजुटता पर जोर दिया। वहीं, उद्धव ठाकरे ने कहा कि परिणामों में कुछ बदलाव हो सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी ने मराठी वोट को मजबूत रखा। संजय राउत ने शिंदे पर ‘जयचंद’ होने का आरोप लगाया, दावा किया कि शिंदे के बिना बीजेपी का मेयर बनना मुश्किल था।

यह चुनाव महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में महायुति की व्यापक जीत का हिस्सा है, जहां बीजेपी ने अधिकांश जगहों पर बढ़त बनाई। मुंबई में पहली बार बीजेपी का मेयर बनना संभव दिख रहा है, लेकिन शिंदे गुट की मांग ने स्थिति को रोचक बना दिया है। आने वाले दिनों में गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से ही मेयर का फैसला होगा। फिलहाल, मुंबई का राजनीतिक माहौल गर्म है और सभी की निगाहें मेयर चुनाव पर टिकी हैं।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version