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नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की आशंका के बीच पार्टी में टूट का खतरा मंडरा रहा है। उद्धव ठाकरे के करीबी नेता संजय राउत और अनिल देसाई दिल्ली पहुंच गए हैं और पार्टी को बचाने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं।संजय राउत ने आरोप लगाया कि उनके सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बागी गुट के पास जरूरी संख्या नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) को तोड़ने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है, जो उनके पास नहीं है। राउत ने स्पीकर को पत्र भी लिखकर इसकी जानकारी दी है।

इस कड़ी में राउत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों पर भरोसा है, हालांकि दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा की। एक सांसद राजाभाऊ वाजे ने भी कहा कि वे उद्धव ठाकरे के साथ हैं और कहीं नहीं जा रहे।महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। संजय राउत और अनिल देसाई कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत और सहयोगियों से मुलाकात कर विरोधी रणनीति का मुकाबला करने की कोशिश में हैं।

सांसदों को करोड़ों रुपये का ऑफर दिए जाने का आरोप

संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं। राउत ने दावा किया कि कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है और पार्टी के अधिकांश सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पूरी तरह विश्वास रखते हैं। राउत ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के लिए इस तरह की गतिविधियां की जा रही हैं और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को प्रभावित करने का प्रयास हो रहा है।

दो-तिहाई बहुमत का सवाल बना अहम

संजय राउत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी राजनीतिक दल में आधिकारिक विभाजन की स्थिति बनती है तो इसके लिए संबंधित विधायकों या सांसदों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। उन्होंने दावा किया कि संभावित बागी गुट के पास आवश्यक संख्या नहीं है और इसलिए पार्टी को औपचारिक रूप से तोड़ना आसान नहीं होगा।

राउत ने कहा कि विपक्षी रणनीति के तहत भ्रम फैलाया जा रहा है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिकांश सांसद पार्टी नेतृत्व के साथ बने रहेंगे और किसी भी तरह की टूट की संभावना को सफल नहीं होने देंगे।

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