अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव में आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित 10 प्रतिशत टैरिफ की धमकी को वापस ले लिया है। यह टैरिफ 1 फरवरी से लागू होने वाला था और ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग का विरोध करने वाले इन देशों पर दबाव बनाने के लिए लगाया गया था। यह विवाद जनवरी 2026 की शुरुआत से तेजी से बढ़ा। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसे खरीदने या नियंत्रित करने की मांग की।
फ्रेमवर्क समझौते के प्रमुख बिंदु क्या हैं?
विभिन्न रिपोर्ट्स और ट्रम्प के बयानों के अनुसार, इस समझौते में ग्रीनलैंड तथा आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को NATO और अमेरिका मिलकर मजबूत करने पर सहमति बनी है। अमेरिका को ग्रीनलैंड में कुछ सीमित क्षेत्रों में नए सैन्य ठिकाने स्थापित करने की अनुमति मिल सकती है। ये ठिकाने जमीन, समुद्र और हवाई निगरानी तथा रक्षा के लिए इस्तेमाल होंगे। इसके अलावा, ट्रम्प के प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम में NATO का सहयोग शामिल होगा। गोल्डन डोम इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित एक उन्नत, बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली है।
जानकारी दे दें कि, यह घटनाक्रम ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का स्पष्ट उदाहरण है, जिसमें व्यापार और सुरक्षा को लीवरेज के रूप में इस्तेमाल किया गया। हालांकि, यूरोपीय सहयोगियों के बीच असंतोष बना हुआ है। कई विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ धमकी से ट्रांसअटलांटिक संबंधों में दरार आई है, भले ही अब समझौता हो रहा हो। NATO में एकजुटता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है, खासकर जब ट्रम्प ने गठबंधन पर दबाव बनाया।
हम आपको बताते चले कि, ट्रम्प के इस फैसले से वैश्विक बाजारों में राहत मिली है। स्टॉक मार्केट में उछाल आया, क्योंकि व्यापार युद्ध की आशंका कम हुई। हालांकि, भविष्य की बातचीत पर सबकी नजर है। यदि फ्रेमवर्क अंतिम समझौते में बदलता है, तो आर्कटिक में भू-राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। यह घटना दर्शाती है कि आर्थिक दबाव और कूटनीति कैसे जटिल मुद्दों को सुलझा सकती है।
