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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। अखरोट एक ड्राई फ्रूट है, जो सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसकी सबसे ज्यादा खेती कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे इलाकों में होती है। ठंडी जलवायु में पैदा होने वाला यह पेड़ आमतौर पर मैदानी इलाकों में उगाना मुश्किल माना जाता है, लेकिन सही तरीके और थोड़ी मेहनत से इसे गमले में भी उगाया जा सकता है। बागवानी का शौक रखने वाले लोग घर पर अखरोट का पौधा लगा सकते हैं।

यहां यह जानना अवश्यक हैं किमले में अखरोट उगाने के लिए सबसे पहले सही किस्म चुनना जरूरी है। बाजार में कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन गमले के लिए बौनी यानी कम ऊंचाई वाली किस्में बेहतर मानी जाती हैं। ये आकार में छोटी रहती हैं और सीमित जगह में अच्छी तरह बढ़ती हैं। नर्सरी से हमेशा ग्राफ्टेड यानी कलम से तैयार पौधा खरीदें, क्योंकि इससे फल जल्दी आते हैं। बीज से तैयार पौधे में फल आने में कई साल लग सकते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग तैयार पौधा लगाना पसंद करते हैं।

बता दें कि, अखरोट का पेड़ बड़ा होता है और इसकी जड़ें गहरी फैलती हैं, इसलिए बड़ा और मजबूत गमला लेना जरूरी है। शुरुआत में कम से कम 18 से 24 इंच चौड़ा और उतना ही गहरा गमला इस्तेमाल करें। पौधे के बढ़ने पर समय-समय पर बड़े गमले में बदलते रहें। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हों, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। मिट्टी की तह के नीचे कंकड़ या टूटे मिट्टी के बर्तन के टुकड़े डाल दें। मिट्टी उपजाऊ और पानी आसानी से निकलने वाली होनी चाहिए। सामान्य बगीचे की मिट्टी में गोबर की खाद, कोकोपीट और थोड़ी रेत मिलाकर मिश्रण तैयार करें। मिट्टी का पीएच स्तर हल्का अम्लीय से सामान्य के बीच होना अच्छा माना जाता है।

वही यह भी बताते चले कि, अखरोट का पौधा ठंडी जलवायु में अच्छी तरह पनपता है। इसे ऐसी जगह रखें जहां सुबह हल्की धूप मिले, लेकिन दोपहर की तेज गर्मी से बचाव हो। गर्म इलाकों में गर्मियों में छायादार जगह पर रखें। सर्दियों में ठंडी हवा और हल्की धूप दोनों मिलनी चाहिए। गमले में उगाने का फायदा यह है कि मौसम के हिसाब से जगह बदली जा सकती है। नियमित पानी दें, लेकिन मिट्टी में पानी जमा न हो। ऊपर की सतह सूखी लगे तभी पानी दें। गर्मियों में पानी की जरूरत बढ़ जाती है, सर्दियों में कम करें। हर एक-दो महीने में गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें।

इस संबंध मे जानकारी देते चले कि, गमले में अखरोट उगाना धैर्य वाला काम है। ग्राफ्टेड पौधे से आमतौर पर तीन से पांच साल में फल मिलना शुरू हो जाता है, जबकि बीज से उगाए पौधे में ज्यादा समय लग सकता है। समय-समय पर हल्की छंटाई करें, ताकि शाखाएं सही आकार में बढ़ें और हवा-रोशनी अंदर तक पहुंचे। सही देखभाल से कुछ सालों बाद गमले में लगा पौधा कश्मीर जैसे स्वादिष्ट और ताजे अखरोट देने लगता है।

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