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ताइवान। चीन और ताइवान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 31 दिसंबर 2025 को नए साल के संदेश में ताइवान के साथ ‘एक होने’ को ‘समय की मांग’ और ‘अटल’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ के चीनी लोग ‘खून के रिश्ते’ से बंधे हैं और मातृभूमि का एकीकरण ऐतिहासिक प्रवृत्ति है, जिसे कोई नहीं रोक सकता।

चीन का ‘जस्टिस मिशन 2025’ अभ्यास 29-30 दिसंबर 2025 को दो दिनों तक चला। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने इसमें ग्राउंड फोर्स, नेवी, एयर फोर्स, रॉकेट फोर्स और कोस्ट गार्ड को शामिल किया। अभ्यास में ताइवान के मुख्य द्वीप को पूरी तरह घेरना, प्रमुख बंदरगाहों की नाकाबंदी, समुद्री और हवाई लक्ष्यों पर सटीक हमले तथा बाहरी हस्तक्षेप को रोकने की प्रैक्टिस की गई। द

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के सैन्य अभ्यासों पर नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अच्छे संबंध रखते हैं और चीन पिछले 20 वर्षों से ऐसे अभ्यास करता आ रहा है। ट्रम्प ने कहा कि शी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके कार्यकाल में ताइवान पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। ट्रम्प ने इसे ‘चिंता की बात नहीं’ बताया और कहा कि वे मानते हैं कि चीन हमला नहीं करेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह संदेश 2026 में शुरू होने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना के शुरुआती साल में आंतरिक एकजुटता और बाहरी दबाव दिखाने का प्रयास है। उन्होंने आर्थिक विकास, एआई, सेमीकंडक्टर और तकनीकी प्रगति पर जोर दिया, लेकिन ताइवान मुद्दे पर कोई नरमी नहीं दिखाई।

बता दें कि, यह स्थिति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। अमेरिका ताइवान को हथियार बेचकर उसकी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है, जबकि चीन इसे ‘लाल रेखा’ मानता है। आने वाले महीनों में, विशेषकर ट्रम्प और शी के बीच संभावित मुलाकातों में, यह मुद्दा प्रमुख रहेगा।

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