Skip to main content

समाचार मिर्ची

ईरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ चल रहे युद्ध में NATO सहयोगी देशों से अलग-थलग पड़ गए हैं। NATO देशों ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते को फिर से खोलने के लिए अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि सहयोगी देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने में मदद नहीं करते, तो NATO का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत 40 से अधिक अधिकारियों के मारे जाने के बाद शुरू में अमेरिका को यह युद्ध सफल लग रहा था, लेकिन 17 दिनों बाद स्थिति बदल गई है। युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से तेल आपूर्ति रोक दी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है। यह स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ट्रम्प अब NATO देशों से इस मार्ग को खुलवाने की अपील कर रहे हैं, लेकिन यूरोपीय देशों ने इसे अपनी लड़ाई नहीं मानते हुए सैन्य सहयोग से इनकार कर दिया है।

जर्मनी ने स्पष्ट कहा है कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि इस मामले पर कभी कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए सैन्य योगदान का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बमबारी से ईरान को झुकाने को गलत तरीका बताया। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिकी नौसेना की ताकत का हवाला देते हुए कहा कि यूरोपीय जहाजों से क्या फर्क पड़ेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश इस बड़े युद्ध में नहीं फंसेगा, हालांकि तेल बाजार की स्थिरता के लिए होर्मुज को खोलना जरूरी है, लेकिन यह आसान नहीं और किसी भी कदम के लिए अधिकतम सहमति जरूरी होगी।

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने बातचीत से समाधान पर जोर दिया और किसी नौसैनिक मिशन के विस्तार का विरोध किया। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी युद्धपोत नहीं भेजने की बात कही है। यूरोपीय संघ ने ट्रम्प की अपील ठुकरा दी और लाल सागर मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने से इनकार किया। यूरोपीय देश अमेरिका-इजराइल के युद्ध के उद्देश्यों पर स्पष्टता चाहते हैं और कूटनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version