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समाचार मिर्ची

फ्रांस। फ्रांस में जी7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बैठक से पहले अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस-पैसिफिक कमांड कर दिया है, जिसमें ‘इंडो’ शब्द हटा दिया गया है।इस कमांड की जिम्मेदारी हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक की है। इसमें अमेरिका का सातवां बेड़ा भी शामिल है। मूल रूप से 1 जनवरी 1947 को पूर्व राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा स्थापित यह कमांड 70 से अधिक वर्षों तक USPACOM के नाम से जानी जाती रही। इसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है

इस बदलाव से भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। QUAD में भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक को आधार बनाया था। नाम में ‘इंडो’ हटाए जाने से संकेत मिलता है कि अमेरिका अब मुख्य रूप से प्रशांत महासागर पर फोकस करेगा।

जी7 शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका का अहम कदम

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले अमेरिका द्वारा लिया गया एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने प्रमुख सैन्य कमांड “इंडो-पैसिफिक कमांड” के नाम में बदलाव करते हुए इसे फिर से “यूएस पैसिफिक कमांड” (USPACOM) नाम देने का फैसला किया है। इस बदलाव के तहत कमांड के नाम से “इंडो” शब्द हटा दिया गया है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसलिए इस बदलाव को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि व्यापक रणनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

मोदी-ट्रंप बैठक पर रहेंगी नजरें

जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विशेष नजर रहेगी। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

ऐसे समय में जब अमेरिका ने अपने प्रमुख सैन्य कमांड के नाम में बदलाव किया है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भविष्य की रणनीति पर क्या संकेत सामने आते हैं।

चलते चलते बताते चले कि, अमेरिका द्वारा इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड करना एक ऐसा निर्णय है जिसने वैश्विक रणनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वपूर्ण बैठक से पहले सामने आया है, जिससे इसकी राजनीतिक और कूटनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। हालांकि इस बदलाव के वास्तविक प्रभावों का आकलन आने वाले समय में अमेरिकी नीतियों और क्षेत्रीय रणनीतिक गतिविधियों के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल यह फैसला भारत-अमेरिका संबंधों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की भविष्य की रणनीति को लेकर नई चर्चाओं का केंद्र बन गया है

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