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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली भारी सफलता से उत्साहित पार्टी अब उसी रणनीति को बंगाल में लागू करने की योजना पर काम कर रही है। हाल ही में पश्चिम बंगाल के प्रभारी मंगल पांडेय और राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल के नेतृत्व में हुई महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में पार्टी ने बूथ स्तर तक की मजबूत संरचना पर जोर दिया। इस बैठक में 294 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी अलग-अलग विधानसभा प्रभारियों को सौंपी गई, ताकि हर क्षेत्र में गहन कार्य हो सके।

बिहार में 2025 के चुनावों में बीजेपी नीत एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर रिकॉर्ड सफलता हासिल की। यहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि महागठबंधन बुरी तरह हार गया। इस जीत का श्रेय बूथ स्तर की गहन तैयारी, पन्ना प्रमुखों की सक्रियता और विकास-केंद्रित मुद्दों को दिया जा रहा है। बीजेपी अब इसी सफलता को बंगाल में दोहराने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि जहां 2016 में मात्र 3 सीटें मिली थीं, वहीं 2021 में 77 सीटें और 38 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करके मजबूत आधार बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी वोट शेयर बरकरार रहा, जो पार्टी के लिए उत्साहजनक है।

चुनावी मुद्दों पर भी पार्टी ने स्पष्ट रुख अपनाया है। विकास, क्राइम फ्री जोन, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे। बीजेपी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इन क्षेत्रों में नाकामयाबी दिखाई है। घुसपैठ को रोकने में असफलता, युवाओं का पलायन, महिला सुरक्षा की चिंताएं और भ्रष्टाचार पार्टी के मुख्य हथियार होंगे। पार्टी ‘सोनार बंगाल’ की अवधारणा को फिर से जीवंत करने का वादा कर रही है, जहां विकास और शांति हो।

वही, विश्लेषकों का मानना है कि 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतीं, लेकिन बीजेपी का वोट शेयर 38 प्रतिशत रहा, जो मजबूत आधार दर्शाता है। अब विशेष मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) के बाद साफ वोटर लिस्ट से पार्टी को फायदा मिल सकता है। उत्तरी बंगाल में हिंदू वोटों का एकीकरण और सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ के मुद्दे पर जोर पार्टी की रणनीति का हिस्सा है।

इस कड़ी में जानकारी दें दे कि, पश्चिम बंगाल के मतदाता अब विकास, सुरक्षा और बेहतर शासन की उम्मीद कर रहे हैं। बीजेपी की यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह समय बताएगा, लेकिन बूथ स्तर की तैयारी और बिहार मॉडल से पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह बंगाल फतह के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। आने वाले महीनों में संगठनात्मक गतिविधियां और तेज होंगी, जो चुनावी मैदान को गर्म कर देंगी।

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