कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले ही राज्य की राजनीति में तापमान बढ़ता नजर आ रहा है। चुनावी शंखनाद से पहले जिन मुद्दों ने राजनीतिक विमर्श को तेज किया है, उनमें एसआईआर (विशेष जांच रिपोर्ट), महिला हिंसा, बांग्लादेशी घुसपैठ और अब मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित ‘बाबरी मस्जिद’ का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन मुद्दों ने राजनीतिक दलों को अपने-अपने तरीके से सक्रिय कर दिया है और संकेत मिल रहे हैं कि आगामी चुनाव में पहचान और धार्मिक भावनाओं से जुड़े विषय प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।
हुमायूं कबीर की नई सियासी पारी
टीएमसी से निष्कासित होने के बाद विधायक हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया। पार्टी गठन के तुरंत बाद उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। जानकारी के अनुसार, 6 दिसंबर को मस्जिद की नींव रखी गई थी और फरवरी से निर्माण कार्य शुरू होने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि मस्जिद करीब 11 बीघा जमीन पर प्रस्तावित है, हालांकि निर्माण की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है।
इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, कबीर ने कुरान की तिलावत के साथ निर्माण कार्य की शुरुआत कर इसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों आयाम दे दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल धार्मिक परियोजना नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। मुर्शिदाबाद, जहां मुस्लिम आबादी का प्रतिशत अधिक है, वहां इस मुद्दे का सीधा असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव में प्रमुख चर्चा का विषय बना रहेगा। योगी आदित्यनाथ के बयान और हुमायूं कबीर की चुनौती ने इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया है। आने वाले हफ्तों में विभिन्न दलों की रैलियों और भाषणों में इस विषय का जिक्र सुनाई दे सकता है।हालांकि चुनाव परिणाम केवल एक मुद्दे पर निर्भर नहीं होते। राज्य में बेरोजगारी, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और ग्रामीण विकास जैसे विषय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। मतदाता इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेते हैं।
