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नई दिल्ली।भारत में खेती तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है। कई राज्यों में किसान अब ड्रोन की मदद से कुछ ही मिनटों में बड़े खेतों में कीटनाशक और खाद का छिड़काव कर रहे हैं। पहले किसानों को दवा छिड़कने में घंटों मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन ड्रोन तकनीक ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया है।

इस कड़ी में जानकारी देते चले कि, सरकार किसानों की मेहनत कम करने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दे रही है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत किसानों और युवाओं को ड्रोन खरीदने पर सब्सिडी प्रदान की जा रही है। ड्रोन के उपयोग से समय, पैसा और मेहनत तीनों बचते हैं। एक ड्रोन कुछ ही मिनटों में कई एकड़ क्षेत्र में स्प्रे कर सकता है, कम पानी में छिड़काव होता है, दवा सही मात्रा में पड़ती है और फसल खराब होने का खतरा घटता है। इससे मजदूरी का खर्च भी कम होता है तथा किसान जहरीले केमिकल्स के सीधे संपर्क से बच जाते हैं।

अंत में यह बताते चले कि, खेती में ड्रोन उड़ाने के लिए ट्रेनिंग और लाइसेंस जरूरी है। इसके लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर में कोर्स पूरा करना पड़ता है। ट्रेनिंग में ड्रोन उड़ाना, खेत की मैपिंग, दवा का सही छिड़काव, बैटरी और मशीन की देखभाल तथा सुरक्षा नियमों का पालन सिखाया जाता है। कोर्स पूरा होने पर उम्मीदवार को सर्टिफिकेट और ड्रोन पायलट लाइसेंस दिया जाता है, जिसके बाद वह खेती में ड्रोन उड़ाने का काम कर सकता है।

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