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देश की राजनीति में चुनावी बयानबाज़ी के बीच ‘वोट चोर’ शब्द को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों की ओर से हाल के दिनों में इस शब्द के लगातार इस्तेमाल पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी के पास इस बात का सबूत है कि किसी व्यक्ति ने किसी भी चुनाव में दो बार मतदान किया है, तो उसे लिखित हलफनामे के साथ पेश किया जाए।

बता दें कि, चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल या नेता के पास मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी का ठोस प्रमाण है, तो वह उसे कानूनी तरीके से प्रस्तुत करें। सिर्फ राजनीतिक मंचों पर आरोप लगाने से मतदाताओं का विश्वास कमजोर होता है और चुनावी प्रक्रिया पर अनावश्यक संदेह पैदा होता है।

विपक्ष ने हाल ही में ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ के सिद्धांत को और सख्ती से लागू करने की मांग की थी। इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कानून भारत के पहले आम चुनाव (1951-52) से ही लागू है और इसका सख्ती से पालन भी किया जाता है। आयोग ने जोर देकर कहा कि अब तक की चुनावी प्रक्रिया में किसी को दो बार वोट डालने का अधिकार नहीं है और यदि कोई व्यक्ति ऐसा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से उनके आरोपों पर सबूत मांगा है। इससे पहले भी कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों की ओर से उन्हें नोटिस जारी किए गए थे।

वही, ‘वोट चोर’ शब्द को लेकर खड़े हुए इस विवाद ने दिखा दिया है कि चुनावी बयानबाज़ी का असर सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं और चुनावी संस्थानों की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है। चुनाव आयोग का यह सख्त संदेश राजनीतिक दलों के लिए एक चेतावनी है कि वे चुनावी विमर्श को गरिमा और तथ्यों के आधार पर ही आगे बढ़ाएं।

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