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हल्दी की नरेन्द्र-01 किस्म किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। यह किस्म सिर्फ सात महीने में तैयार हो जाती है और कम लागत में अधिक आय दे रही है।नरेन्द्र-01 हल्दी की पैदावार एक बीघे में 70 से 80 क्विंटल तक हो सकती है। यदि बाजार में 100 रुपये प्रति किलो की दर मिले तो एक बीघे से 7 से 8 लाख रुपये तक की कमाई संभव है। इस किस्म में करीब 5 प्रतिशत कर्क्यूमिन की मात्रा है।इस किस्म की हल्दी का रंग गहरा पीला और सुगंध प्राकृतिक होती है। फार्मास्यूटिकल और कॉस्मेटिक उद्योगों में इसकी अच्छी मांग है। इससे बाजार में सामान्य हल्दी की तुलना में बेहतर मूल्य मिलता है।

यह किस्म रेतीली या दोमट मिट्टी में अच्छी उपज देती है। बुआई के समय rhizomes के बीच करीब 1.5 फीट की दूरी और 8 से 10 सेंटीमीटर गहराई रखनी चाहिए। खाद के रूप में गाय के गोबर की खाद के साथ संतुलित मात्रा में पोटाश, फॉस्फोरस और सल्फर का उपयोग किया जाता है। पत्तियां सूखने पर फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है।उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में इस किस्म को ‘पीला सोना’ कहा जा रहा है। किसान कम मेहनत, कम लागत और कम जोखिम के साथ इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

खेती की दृष्टि से यह किस्म रेतीली और दोमट मिट्टी में अच्छी उपज देती है। बुआई के समय rhizomes के बीच लगभग 1.5 फीट की दूरी रखना उचित माना जाता है, जबकि इसे 8 से 10 सेंटीमीटर की गहराई में बोया जाता है। फसल की अच्छी वृद्धि के लिए जैविक खाद के रूप में गाय के गोबर की खाद का उपयोग किया जाता है, साथ ही संतुलित मात्रा में पोटाश, फॉस्फोरस और सल्फर का प्रयोग भी जरूरी होता है। इन पोषक तत्वों के सही उपयोग से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

कुल मिलाकर, नरेन्द्र-01 हल्दी की किस्म आधुनिक कृषि में एक सफल उदाहरण के रूप में उभर रही है। इसकी बेहतर पैदावार, कम अवधि में तैयार होने की क्षमता और उच्च बाजार मांग इसे किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करते हैं, तो यह उनके लिए स्थायी आय का एक मजबूत स्रोत बन सकती है और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

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