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हरियाणा। हरियाणा सरकार की भावांतर भरण-पाई योजना किसानों को बाजार जोखिम से बचाने के लिए शुरू की गई है। यदि मंडी में फसल का भाव सरकार द्वारा निर्धारित संरक्षित मूल्य (MSP जैसा) से कम हो जाता है, तो सरकार अंतर राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के माध्यम से जमा करेगी। इससे किसानों को संरक्षित मूल्य सुनिश्चित होता है।

योजना के तहत किसानों को अपनी फसल की बुआई की जानकारी समय पर ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर दर्ज करानी होगी। पंजीकरण के बाद मंडी में फसल बेचने पर J-Form या विक्रय रसीद रखनी होगी, जिसके आधार पर नुकसान का आकलन किया जाएगा और अंतर राशि Aadhaar से लिंक बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

उदाहरण के तौर पर, यदि सरकार ने फसल का संरक्षित मूल्य 2500 रुपये तय किया है और किसान उसे 2200 रुपये में बेचता है, तो सरकार 300 रुपये प्रति यूनिट का अंतर देगी। यदि मंडी भाव संरक्षित मूल्य से अधिक है, तो कोई भुगतान नहीं किया जाएगा और किसान सीधा लाभ उठाएगा।यह योजना मुख्य रूप से बागवानी फसलों (सब्जी और फल) तथा बाजरा पर प्रभावी है। किसान पोर्टल पर बुआई विवरण दर्ज कराकर और बिक्री के दस्तावेज रखकर योजना का लाभ ले सकते हैं।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। सबसे पहले, उन्हें अपनी फसल की बुआई की जानकारी समय पर ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। यह पंजीकरण अनिवार्य है, क्योंकि इसी के आधार पर सरकार यह तय करेगी कि किसान इस योजना के लिए पात्र है या नहीं।

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