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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। टमाटर के लिए हम आपको बता दें कि, मंडी में टमाटर के दाम गिरने पर किसानों को अक्सर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार लागत भी नहीं निकल पाती और मजबूरन टमाटर फेंकने पड़ते हैं। लेकिन अब बाजार में भाव कम मिलने पर टमाटर फेंकने के बजाय उसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट में बदलने की सलाह दी गई है।आधुनिक तकनीक और देसी जुगाड़ के मेल से किसान एक्स्ट्रा फसल से ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार कर सकते हैं जिनकी डिमांड साल भर बनी रहती है। इससे टमाटर की बर्बादी रुकती है और किसानों की आमदनी दोगुनी हो सकती है।

टमाटर का पाउडर दिलाएगा मुनाफा
अधिक मात्रा में टमाटर होने और सड़ने के डर की स्थिति में टोमैटो पाउडर बनाना सबसे अच्छा तरीका है। टमाटरों को बारीक काटकर अच्छी तरह सुखाकर पीस लिया जाता है। इस पाउडर की शेल्फ लाइफ ज्यादा होती है और इसका उपयोग सूप, सॉस, चिप्स तथा मसालों में होता है। ऑफ-सीजन में ताजे टमाटर महंगे होने पर यह पाउडर ऊंचे दामों पर बिक सकता है। यह तरीका स्टोरेज की समस्या वाले किसानों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है।

मार्केट में टमाटर के प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे केचप, सॉस और प्यूरी की मांग हमेशा बनी रहती है। किसान छोटे स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर घर पर शुद्ध प्रोडक्ट्स तैयार कर सकते हैं। टमाटर स्वाद वाली नमकीन और पापड़ का ट्रेंड भी बढ़ा है। फसल को ब्रांड के रूप में पैकेटबंद करके बेचने से मुनाफे का मार्जिन कई गुना बढ़ जाता है।किसान व्हाट्सएप ग्रुप्स, लोकल हाट और ऑर्गेनिक स्टोर के जरिए प्रोडक्ट्स सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। सरकार फूड प्रोसेसिंग के लिए सब्सिडी और ट्रेनिंग भी दे रही है, जिससे छोटी यूनिट को बड़ा बिजनेस बनाया जा सकता है।

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