नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी दस्तावेजों से पता चला है कि NTA का गठन मात्र 50 रुपये की फीस पर एक अस्थायी ‘सोसायटी मॉडल’ के तहत किया गया है। यह व्यवस्था UPSC और SSC जैसी मजबूत वैधानिक संस्थाओं से काफी कमजोर बताई जा रही है।
दस्तावेजों के अनुसार, NTA का रजिस्ट्रेशन ‘सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860’ के तहत 15 मई 2018 को दिल्ली में हुआ था। सहकारिता कानून के इस मॉडल के कारण संस्था का प्रशासनिक ढांचा एडहॉक (अस्थायी) है। आलोचक पूछ रहे हैं कि इतनी संवेदनशील परीक्षाओं को संभालने वाली एजेंसी का कानूनी आधार इतना हल्का कैसे हो सकता है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय NTA को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस तरह देते हैं। क्या संस्था के ढांचे में बड़े सुधार किए जाएंगे या फिर एक नए वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। फिलहाल इतना तय है कि NEET-UG 2026 विवाद ने भारत की परीक्षा प्रणाली को लेकर एक बड़ी राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
