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नेपाल इन दिनों एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। जेनजी आंदोलन (GenZ Protest) ने देश को झकझोर कर रख दिया है। चौथे दिन भी आंदोलन की तपिश कम नहीं हुई और नेपाल के कई हिस्सों में कर्फ्यू जारी रहा। भारत-नेपाल सीमा पर रक्सौल बॉर्डर को पूरी तरह बंद रखा गया है, जिसके कारण दोनों ओर आवाजाही बाधित है। विदेशी नागरिकों के नेपाल में प्रवेश पर रोक लगी हुई है। हालांकि, बीमार या आपात स्थिति वाले लोगों को विशेष अनुमति के बाद ही नेपाल में जाने दिया जा रहा है।

बता दें कि, इस बीच नेपाल के वैसे लोग जो किन्हीं कारणों से भारत या अन्य देशों से स्वदेश लौट रहे हैं, उनके लिए एडवाइजरी जारी की गई। नेपाल से सटे पूर्वी चंपारण के रक्सौल बॉर्डर से नेपाल में उन्हीं लोगों को प्रवेश मिल रही है, जो या तो बीमार हैं। या फिर किसी अन्य आपात स्थिति में नेपाल की ओर लौटना चाह रहे हैं।

3 लाख से अधिक भारतीय फंसे नेपाल में

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 3 लाख भारतीय नागरिक नेपाल में फंसे हुए हैं। इनमें से अधिकांश लोग पर्यटन या रिश्तेदारों से मिलने के लिए नेपाल गए थे। लेकिन अचानक भड़के आंदोलन और उसके बाद कर्फ्यू ने उन्हें वहीं रोक दिया।

आगे की राह क्या?

नेपाल का संकट केवल आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव भारत और दक्षिण एशिया तक महसूस किए जा रहे हैं।

  1. राजनीतिक दबाव: देउवा प्रकरण ने नेपाल की राजनीति को हिला दिया है। विपक्ष अब और आक्रामक हो सकता है।
  2. जनता का गुस्सा: युवाओं का यह आंदोलन अभी थमता नहीं दिख रहा।
  3. भारत पर असर: सीमा बंद होने से भारत-नेपाल के रिश्तों में असहजता बढ़ सकती है।
  4. अर्थव्यवस्था पर चोट: पर्यटन, व्यापार और रोज़गार सभी पर संकट मंडरा रहा है।

बता दें कि, नेपाल आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां जनता बनाम राजनीति की जंग चरम पर है। जेनजी आंदोलन ने न केवल सरकार की नींव हिला दी है बल्कि नेताओं की कथित भ्रष्ट गतिविधियों को भी उजागर किया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा के घर से सुरंग के ज़रिए कैश और सोना बरामद होने की खबर ने आंदोलन को और भड़का दिया है।

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