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अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अपनी सदस्यता आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी है। 22 जनवरी 2026 को अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) तथा विदेश विभाग ने इसकी पुष्टि की, जिससे करीब 78 वर्ष पुरानी सदस्यता का अंत हो गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन ही, 20 जनवरी 2025 को, एक कार्यकारी आदेश जारी कर WHO से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू की थी। यह फैसला एक साल की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी होने के बाद प्रभावी हुआ है।

जानकारी दे दें कि, अमेरिका पर WHO का बकाया राशि लगभग 260 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,380 करोड़ रुपये) है। यह राशि मुख्य रूप से 2024 और 2025 के लिए निर्धारित सदस्यता शुल्क (assessed contributions) का हिस्सा है। ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यह बकाया राशि नहीं चुकाई जाएगी, क्योंकि अमेरिकी करदाताओं ने पहले ही संगठन को जरूरत से कहीं अधिक धन दिया है।

, अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से बाहर निकलने के लिए एक साल पहले लिखित नोटिस देना और सभी बकाया राशि का भुगतान करना अनिवार्य होता है। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने इस प्रावधान का खंडन किया है। अधिकारी का कहना है कि कानून में निकासी से पूर्व भुगतान की कोई स्पष्ट बाध्यता नहीं है और यह मामला अब WHO की कार्यकारी बोर्ड की फरवरी 2026 की बैठक में चर्चा का विषय बनेगा। WHO का पक्ष है कि बकाया चुकाए बिना सदस्यता समाप्ति पूरी नहीं मानी जा सकती, लेकिन अमेरिका इस दावे को खारिज कर रहा है।

यह फैसला ट्रम्प की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा माना जा रहा है। उनके दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संगठनों से दूरी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं, जैसे पेरिस जलवायु समझौता से बाहर निकलना और अन्य संयुक्त राष्ट्र निकायों में फंडिंग कम करना। WHO से निकासी 1948 में शामिल होने के बाद अमेरिका की लंबी सदस्यता का अंत है। ट्रम्प ने 2020 में भी इसी तरह की कोशिश की थी, लेकिन बाइडेन प्रशासन ने इसे रद्द कर दिया था।

वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो सकती है। WHO वैश्विक स्तर पर महामारी संकटों में समन्वय का प्रमुख मंच है। अमेरिका के बाहर निकलने से बजट में बड़ी कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे स्टाफ में कमी, कार्यक्रमों में देरी और विकासशील देशों को मिलने वाली सहायता प्रभावित होगी।

कुल मिलाकर, अमेरिका का WHO से बाहर निकलना अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। WHO अब अन्य सदस्य देशों—जैसे चीन, यूरोपीय संघ और भारत—से अधिक योगदान की उम्मीद कर रहा है। यह फैसला वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में लंबे समय तक असर डाल सकता है, खासकर जब दुनिया नई महामारियों के खतरे से जूझ रही है।

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