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नई दिल्ली। कांग्रेस ने शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं बल्कि ‘ऑपरेशन कीचड़’ करार दिया।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा इन सीटों पर अपना कमल नहीं खिलवा सकी, इसलिए दूसरी पार्टियों के सांसद तोड़ने में लगी है। उन्होंने पूछा कि भाजपा 240 सीटों पर ही क्यों रुक गई, 400 सीटें क्यों नहीं मिलीं? साथ ही यह भी सवाल किया कि क्या भाजपा का मकसद संविधान बदलना है।

शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह ने शिंदे गुट में शामिल होने और सत्तारूढ़ एनडीए को समर्थन देने का फैसला लिया है। यह उद्धव ठाकरे गुट को दूसरा बड़ा झटका बताया जा रहा है।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि महाराष्ट्र में सिर्फ एक ही शिवसेना है, जिसके प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अन्य दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

पवन खेड़ा ने भाजपा से पूछे कई सवाल

मीडिया से बातचीत के दौरान पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा उन सीटों पर जनता का भरोसा जीतने में सफल नहीं हुई, जहां विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को जीत मिली थी। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में इतनी मजबूत है, तो उसे दूसरे दलों के सांसदों को अपने साथ लाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

उन्होंने लोकसभा चुनाव के परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा अपने दम पर 400 सीटों के लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और 240 सीटों पर ही रुक गई। खेड़ा ने सवाल उठाया कि यदि जनता का इतना व्यापक समर्थन भाजपा के साथ होता, तो उसे अन्य दलों के निर्वाचित सांसदों को अपने साथ जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

छह सांसदों के फैसले से उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका

जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल होने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने का फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

इससे पहले वर्ष 2022 में भी शिवसेना में बड़ी टूट देखने को मिली थी, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने अलग होकर नई राजनीतिक दिशा अपनाई थी। उस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की तत्कालीन महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी और राज्य में नई सरकार का गठन हुआ था।अब लोकसभा सांसदों के स्तर पर हुआ यह बदलाव शिवसेना की आंतरिक राजनीति और भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिवसेना (यूबीटी) इस राजनीतिक झटके से कैसे उबरने की कोशिश करती है और महाराष्ट्र में विपक्षी दल अपनी रणनीति किस प्रकार तैयार करते हैं। वहीं एनडीए के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से कितना लाभकारी साबित होता है, इसका आकलन आगामी चुनावों और संसदीय गतिविधियों के दौरान होगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है, जबकि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम के राजनीतिक प्रभावों पर लगातार नजर बनी हुई है

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