समाचार मिर्ची

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर समझौता पूरा किया, जिसे दोनों पक्ष ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं। यह समझौता लगभग दो दशकों की लंबी और रुक-रुक कर चलने वाली बातचीत के बाद नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में यह डील अंतिम रूप से तय हुई। यह समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है, जिसमें करीब 2 अरब लोगों का बाजार, वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत और कुल मिलाकर 27 ट्रिलियन डॉलर का संयुक्त बाजार शामिल है।

इस संबंध में यह जानकारी दे दें कि, समझौते के तहत EU भारत से आने वाले 99 प्रतिशत से अधिक सामानों पर टैरिफ खत्म या काफी कम करेगा, जबकि भारत भी EU के 96.6 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ में कटौती या उन्मूलन करेगा। इससे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, स्पोर्ट्स गुड्स, टॉयज और कुछ मरीन प्रोडक्ट्स को यूरोपीय बाजार में बिना ड्यूटी के बड़ा अवसर मिलेगा। EU के अनुसार यह समझौता 2032 तक EU के भारत में निर्यात को दोगुना कर सकता है और दोनों पक्षों के बीच व्यापार को कई गुना बढ़ा सकता है। हालांकि समझौते को अभी कानूनी जांच, 24 यूरोपीय भाषाओं में अनुवाद, यूरोपीय संसद की मंजूरी और दोनों पक्षों की आंतरिक प्रक्रियाओं से गुजरना है, लेकिन 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक यह लागू हो सकता है।

वही, ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (APTMA) के चेयरमैन कामरान अरशद ने कहा कि भारत अब EU बाजार में काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया है। कई सेक्टर्स में पाकिस्तान की GSP प्लस बढ़त खत्म हो चुकी है। FPCCI के उपाध्यक्ष साकिब फैयाज मगून ने चेतावनी दी कि भारत को जीरो टैरिफ मिलते ही पाकिस्तान की बढ़त खत्म हो जाएगी और निर्यात को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि बाजार एक बार हाथ से निकल गया तो वापस पाना बहुत मुश्किल होता है। एक पूर्व वाणिज्य मंत्री ने इसे ‘जीरो-टैरिफ हनीमून’ का अंत बताया और कहा कि 9 अरब डॉलर के निर्यात अब कमजोर पड़ सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत की वैल्यू एडिशन और वर्टिकल इंटीग्रेशन क्षमता मजबूत होने से वह EU में पाकिस्तान से आगे निकल सकता है। पाकिस्तान के निर्यात में 15 प्रतिशत की कमी भी 1.5 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा सकती है। यह डील न केवल पाकिस्तान बल्कि बांग्लादेश और तुर्की जैसे अन्य देशों के टेक्सटाइल निर्यातकों को भी प्रभावित कर सकती है।

मालूम हो कि, ये लक्ष्य को मजबूत करेगा। दोनों पक्षों ने इसे ऐतिहासिक बताया है, जो वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका दर्शाता है। पाकिस्तान के लिए यह चुनौती है कि वह अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाए, GSP प्लस को बचाए और नए बाजार तलाशे। आने वाले महीनों में समझौते की रैटिफिकेशन और प्रभाव का असली चित्र साफ होगा, लेकिन फिलहाल यह दक्षिण एशिया के व्यापार समीकरण को बदलने वाला कदम साबित हो रहा है।

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