बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए एक हालिया सर्वे ने राजनीतिक गलियारों में तूफान मचा दिया है। इस सर्वे में राज्य के 91.31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्पष्ट रूप से माना कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से आयोजित किए जाते हैं। साथ ही, 83.61 प्रतिशत लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर भरोसा जताया।
जानकारी दे दें कि, सर्वे में कुल 5,100 नागरिकों से बातचीत की गई, जो राज्य के चार प्रमुख डिवीजनों—बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु—के 102 विधानसभा क्षेत्रों से यादृच्छिक रूप से चुने गए थे। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 91.31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष माना (जिसमें 84.55% ने सहमति और 6.76% ने न्यूट्रल राय दी)। ईवीएम की विश्वसनीयता पर पूछे गए सवाल में 83.61 प्रतिशत लोगों ने इसे भरोसेमंद बताया, जो 2023 के 77.9 प्रतिशत से उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
बता दें कि, बीजेपी ने इन नतीजों को हाथों-हाथ लिया और कांग्रेस पर जमकर बरसी। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग और ईवीएम के बारे में झूठ बोलते रहते हैं, लेकिन कर्नाटक में उनकी अपनी कांग्रेस सरकार ने उनका फैक्ट-चेक कर दिया।” पूनावाला ने सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जहां जनता ईवीएम पर भरोसा बढ़ा रही है, वहीं कांग्रेस हार के बाद मशीनों को दोषी ठहराती है।
जानकारी दे दें कि, यह विवाद भारतीय राजनीति में ईवीएम को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस का नया अध्याय है। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कई बार ईवीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने संसद में और सार्वजनिक मंचों पर बार-बार कहा है कि ईवीएम में हैकिंग की संभावना है और वोट चोरी हो रही है। वहीं, चुनाव आयोग लगातार ईवीएम को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बता रहा है।
यह घटना भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को भी रेखांकित करती है, जहां मतदाता जागरूकता बढ़ रही है और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत हो रहा है। हालांकि राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक होंगे।
